
प्याज की फसल में खुशहाली की उम्मीद, धूप व भीषण गर्मी में भी मेहनत से जुट रहे किसान
पिनान. ग्रामीण अंचल के किसान इन दिनों खेतों में लहलहाती प्याज़ की फसल को लेकर भविष्य की उम्मीदें संजोए हुए हैं। मेहनत, पसीना और धैर्य से तैयार की जाने वाली यह फसल किसानों के चेहरे पर नई चमक लेकर आएगी। खेतों पर किसानों की व्यस्तता और उत्साह इसी उम्मीद को लेकर साफ दिखाई दे रहा है।किसान लालाराम यादव, अमरसिंह यादव आदि का कहना है कि इस वर्ष मौसम का साथ मिलने से प्याज़ की पैदावार अच्छी होने की संभावना है। हालांकि खाद, बीज और सिंचाई की बढ़ती लागत ने उनकी चिंता बढ़ा दी है, फिर भी बेहतर बाजार भाव की उम्मीद किसानों के हौसले बढ़ा रही हैं। सुबह से लेकर शाम तक किसान खेतों में मेहनत कर रहे हैं। कहीं सिंचाई की जा रही है तो कहीं फसल की देखभाल। उनका मानना है कि यदि मंडियों में प्याज़ के उचित दाम मिलें, तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है।
प्याज़ की खेती किसानों के सपनेग्रामीण क्षेत्रों में प्याज़ की खेती केवल आय का साधन नहीं, बल्कि किसानों के सपनों, परिवार की खुशियों और भविष्य की उम्मीदों का आधार बन चुकी है। किसान उम्मीद भरी नजरों से बाजार और मौसम दोनों पर निगाह बनाए हुए हैं, ताकि उनकी मेहनत सफल हो और जीवन में खुशहाली आए।
....................
अन्नदाता खेतों से लेकर घर तक लाल प्याज के बीज तैयार करने में जुटे
अकबरपुर. इन दिनों किसानों की मेहनत खेतों से लेकर घरों तक दिखाई दे रही है। लाल प्याज के बीज तैयार हो चुके हैं और अन्नदाता तेज गर्मी व चिलचिलाती धूप में पसीना बहाकर खेतों से बीज उखाड़कर घरों तक ला रहे हैं। किसान परिवार बीज को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सावधानी बरत रहे हैं। किसान गर्मी में घरों के बाहर सोने को मजबूर होते हैं, लेकिन लाल प्याज के बीज को उमस, गर्मी और बरसात से बचाने के लिए घरों के कमरों में पंखे और कूलर चलाकर उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है। कई किसान अपने कमरों को बीज से भर देते हैं, ताकि नमी और खराब मौसम से लाल प्याज का बीज खराब न हो। यहां तक कि रिश्तेदार आने पर भी किसान परिवार बीज की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। लाल प्याज की खेती अब प्रमुख नकदी फसल बन चुकी है। फरवरी से अप्रेल तक लाल प्याज के बीज तैयार होते हैं, इसके बाद किसान कण की बुवाई करते हैं और अब गंठियां तैयार हो चुकी हैं। मई से जुलाई तक बरसाती मौसम में किसान बीजों को घरों में सुरक्षित रखकर सुखाते हैं। अगस्त में नई बुवाई शुरू होती है और दीपावली के आसपास नई फसल मंडियों तक पहुंचने लगती है। इस प्रकार, लाल प्याज की खेती लगभग पूरे वर्ष किसानों को आय और काम प्रदान करने वाली फसल बन चुकी है।
- गर्मी में फसल खेतों में होने लगी खराबप्रतापगढ़. परंपरागत खेती छोड़कर हाथ खर्च देने वाली नकदी की फसल के रूप में सब्जियों की पैदावार करने वाले किसानों को इस समय भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। सब्जी मंडियों में उचित मूल्य नहीं मिलने और खरीद कम होने से कई किसानों की फसल खेतों में बनी झोपड़ियों में सूखकर खराब हो रही है।
गांव टोडा निवासी किसान राजेश आदि ने बताया कि दो बीघा जमीन पर टिंडा और भिंडी की खेती की है। घर के सात-आठ सदस्य दिन-रात मेहनत कर बीज, दवा, सिंचाई और तुड़ाई करते हैं, लेकिन मजदूरी, बीज, दवा और सिंचाई के खर्च ही नहीं निकल रहा। सब्जियों के दाम सही नहीं मिलने से लागत ही नहीं निकल रही। किसान विष्णु सैनी ने बताया कि भीषण गर्मी में फसल को दिन में दो बार पानी देना पड़ता है और जहरीले जीव-जंतुओं के बीच खेती करना पड़ती है, फिर भी मंडियों तक ले जाने का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा।सब्जी मंडी के आढतियां दीपा माली ने बताया कि इन दिनों भिंडी 5-6 रुपए, टिंडा 10-12, ग्वार की फली 13-14, हरा धनिया 13-14 और टमाटर 15 रुपए प्रति किलो थोक भाव में बिक रहे हैं। जहां किसान कम कीमत से परेशान हैं। हालांकि ग्राहक नियंत्रित कीमत में सब्जी मिलने से संतुष्ट हैं।
Updated on:
22 May 2026 03:42 pm
Published on:
22 May 2026 03:42 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
