
गुर्जरपुर खुर्द के बेर सब को अपनी मिठास का दीवाना बना रहे है।
अलावडा. गुर्जरपुर खुर्द के बेर सब को अपनी मिठास का दीवाना बना रहे है। इनका रंग भले ही हरा और पीला है, लेकिन इनकी मिठास चीनी से कम नहीं है।
बागवानी किसान सूरजमल सैनी ने बताया कि गांव में पानी की कमी के कारण परंपरागत खेती में बहुत ही कम मुनाफा होता है। अपने 2 बीघा से अधिक खेत में बेरों का बाग लगाया। बेर के बगीचे से करीब 50 हजार से 1 लाख रुपए तक हर साल मुनाफा हो जाता है। इस बार भी बेरों की बंपर पैदावार हुई है। यहां के बेर आसपास ही नहीं देशभर में मशहूर है। चीकू के आकार के ये बेर खाने में स्वादिष्ट तो हैं ही, इनकी डिमांड भी खूब रहती है। मकर संक्रांति से पहले ही इन बेरों के सीजन की शुरुआत होती है।
किसान सूरज मल सैनी ने बताया कि एक बेर का वजन 80 से 100 ग्राम है। वह उत्साहित है। बेर की खेती फायदे का सौदा है। बागवानी में कई प्रजातियों के बेर। गोला, खट्टा-मीठा, पेमली, छुआरा, सेब सहित कई तरह के बेरों की पैदावार की जाती है। दिल्ली, अलवर, गुरुग्राम, सोहना, जयपुर, जोधपुर, मथुरा आदि तक सप्लाई हो रहे है। बेरों की मांग दिनों दिन बढ़ रही है। दाम भी अच्छे मिल रहे हैं।बागवान दिन व रात्रि में पशु-पक्षियों से बागों की रखवाली करते हैं। 120 रुपए किलो तक बिकते हैं बेर। सीजन खत्म होने तक 50 से 80 रुपए किलो तक आ जाता है।
सैनी बताते हैं कि गुर्जर पुर खुर्द में बेर का सीजन 14 जनवरी से शुरू होता है और मई तक चलता है। बेर के पौधे की खास बात यह है, कि वह कम पानी में काफी अच्छी पैदा देता है। बेर के फल में कई औषधीय गुण भी होते हैं। बेर में प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम और कैल्शियम पाया जाता है। यदि बेर का नियमित सेवन किया जाए तो यह कैंसर की कोशिकाओं को बढऩे से रोकता है। बेर के सेवन से दांत और हड्डी के रोगों में लाभ मिलता है। साथ ही पाचन क्रिया भी सही रहती है।
Published on:
10 Feb 2024 08:13 pm
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