
सरिस्का में आग का फैलाव नहीं रूका तो बाघ- बघेरों को हो सकता है खतरा
सरिस्का में आग का फैलाव नहीं रूका तो बाघ- बघेरों को हो सकता है खतरा
- सरिस्का में अभी 27 बाघ, 200 से ज्यादा पैंथर व बड़ी संख्या में सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली ***** - जंगल में आग लगने से सबसे ज्यादा नुकसान जमीन पर चलने वाले सांप, नेवला व छोटे जानवर को
अलवर. सरिस्का बाघ परियोजना में लगी आग का फैलाव जल्द नहीं रूका तो बाघ- बघेरों को खतरा हो सकता है। अभी सरिस्का में 27 बाघ, 200 से ज्यादा पैंथर, 300 से ज्यादा जरख तथा बड़ी संख्या में सांभर, चीतल, सुअर, नीलगाय सहित अन्य वन्यजीव हैं। आग लगने का सबसे ज्यादा नुकसान जमीन पर रेंगने वाले सांप, नेवला, गोहरा सहित अन्य स्तनधारी जीवों का हुआ है। आग लगने से बड़ी संख्या में स्तनधारी जीवों की अकाल मौत हुई है। सरिस्का में रविवार को अकबरपुर रेंज के अंतर्गत बालेटा- पृथ्वीपुरा नाला के कटीघाटी क्षेत्र में आग लगी थी। यह आग बढ़कर सुकाेला, डाबली होते नाहरसती धार्मिक स्थल के आसपास तक फैल गई है। खास बात इसी क्षेत्र में सरिस्का में बाघिन एसटी-17 व दो शावक, बाघ एसटी-20 व एसटी-23 का आवास है।
सरिस्का बाघ परियोजना में अग्नि दुर्घटना वाले वन क्षेत्रों में अग्नि नियंत्राण पर काबू पाने हेतु भारतीय वायु सेना के दो हैलीकॉप्टर्स द्वारा बुधवार दोपहर तक 22 राउण्ड लगाकर अग्निशमन की कार्यवाही की गई।
सरिस्का बाघ परियोजना अलवर के वन संरक्षक एवं क्षेत्रा निदेशक आर.एन मीणा ने बताया मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एवं जिला कलक्टर ने अग्नि दुर्घटना वाले क्षेत्रों का जायजा लिया एवं अग्निशमन कार्यवाही की प्रगति एवं अग्नि के फैलाव की रोकथाम के संदर्भ में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मंगलवार 29 मार्च तक वन क्षेत्रा में अग्नि काफी तादात में फैली हुई थी जो अब हैलीकॉप्टर्स के द्वारा अग्निशमन कार्यवाही के अतिरिक्त ग्राउंड लेवल पर अग्नि दुर्घटना वाले वन क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, नेचर गाइड्स, एसडीआरएफ, ईको डवलपमेंट कमेटी तथा समीपस्थ ग्रामीणों द्वारा अग्नि के फैलाव के रोकथाम के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों से लगभग नियंत्राण की स्थिति में आ गई है। उन्होंने आशा जताई है कि जिस प्रकार युद्ध स्तर पर अग्नि नियंत्राण हेतु सामूहिक रूप में कार्य किया जा रहा है इससे आज देर सांय/रात्रि तक अग्नि दुर्घटना पर लगभग नियंत्राण पा लिया जावेगा।
उन्होंने बताया कि अग्नि दुर्घटना पर पूर्णतः नियंत्राण पाने के लिए दोनों ही प्रकार के ऑपरेशन आगामी आदेशों तक जारी रहेंगे क्योंकि अनेकों बार अग्नि दुर्घटना स्थलों पर अथवा उसके समीप के वन क्षेत्रों में अधजले ठूंठों द्वारा भी पुनः दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। उप वन संरक्षक सरिस्का एवं उप वन संरक्षक वन्यजीव जयपुर तथा क्षेत्राीय वन अधिकारी द्वारा अकबरपुर से अग्नि दुर्घटना से प्रभावित वन क्षेत्रों एवं लगते हुए वन क्षेत्रों के संबंध में वर्तमान स्थिति का फीडबैक लिया गया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों में अग्नि दुर्घटनाओं को नियंत्रित कर वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु कटिबद्ध है।
Published on:
30 Mar 2022 05:01 pm
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
