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नर्सिंग में बड़ा फर्जीवाड़ा… घर बैठे लीजिए 1.40 लाख में ANM व 2.40 लाख में GNM की डिग्री 

अलवर जिले में नर्सिंग शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। नर्सिंग शिक्षा की कई दुकानें खुल गई हैं, जो पैसा लेकर डिग्रियां बांट रही हैं।

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अलवर जिले में नर्सिंग शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। नर्सिंग शिक्षा की कई दुकानें खुल गई हैं, जो पैसा लेकर डिग्रियां बांट रही हैं। पैसा देने पर कॉलेज जाने की जरूरत नहीं है। पास कराने की भी फुल गारंटी है। मोटी फीस लेकर बीएससी नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम जैसी डिग्रियां बांटी जा रही हैं। ऐसी तमाम शिकायतों के बाद पत्रिका रिपोर्टर ने पड़ताल शुरू करते हुए शहर के एक नर्सिंग कॉलेज के संचालक से फोन पर बात की, तो कॉलेज संचालक ने मध्यप्रदेश से सभी नर्सिंग कॉलेजों से डिग्री दिलाने का दावा किया।

एनएनएम कोर्स के लिए एक लाख 40 हजार और जीएनएम कोर्स के लिए 2 लाख 40 हजार रुपए मांगे। साथ ही बिना पढ़ाई व प्रैक्टिकल के पास कराने की गारंटी दी। कॉलेज संचालक ने कहा कि हम पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से कोर्स कराते हैं। डिग्री के साथ यहां रजिस्ट्रेशन खुद करवाकर देंगे। उसने यह भी दावा किया कि राजस्थान में काउंसलिंग होती है। प्रतिशत के आधार पर नंबर आता है। इसमें भी कहीं भी कॉलेज अलॉट हो सकता है। हमारे पास करोगे तो कोई लफड़ा नहीं है।

जिलेभर में 20, शहर में 10 नर्सिंग कॉलेज

जिले में 20 से अधिक ऐसे कथित नर्सिंग कॉलेजों का संचालन हो रहा है। अलवर शहर में 8 से 10 इस तरह के नर्सिंग कॉलेज हैं। इनमें न तो नियमित कक्षाओं का संचालन हो रहा है और न ही छात्रों को अनिवार्य प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नर्सिंग कोर्स कराने के नाम पर मोटी राशि लेकर पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से डिग्री दिला रहे हैं।

न भवन, न लैब, न अस्पताल… फिर कैसे मिल रही डिग्री?

नर्सिंग काउंसिल के नियम हैं कि नर्सिंग कॉलेज के पास पर्याप्त भूमि, आधुनिक लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल और संबद्ध अस्पताल होना अनिवार्य है। अलवर जिले में कई कॉलेज संकरे या किराए के भवनों में चल रहे हैं। लैब और आवश्यक उपकरण नाम के हैं। अस्पताल से संबद्धता केवल फाइलों में दर्ज है। धरातल पर छात्रों को न तो क्लीनिकल एक्सपोजर मिल रहा है और न ही मरीजों के बीच काम करने का अनुभव।

प्रशासन और नर्सिंग काउंसिल की चुप्पी पर सवाल

नर्सिंग जैसे संवेदनशील और जिम्मेदार पेशे में इस तरह का फर्जीवाड़ा केवल शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए खतरे की घंटी है। अयोग्य और अप्रशिक्षित नर्सेज अस्पतालों में मरीजों की जान के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है। इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन और नर्सिंग काउंसिल की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।

टॉपिक एक्सपर्ट

राज्य में नर्सिंग संस्थान संचालन के सरकार के नियम बने हुए हैं। इसके लिए मानक संस्थाओं आरयूएचएस व राजस्थान नर्सिंग कौंसिल से संबद्धता आवश्यक है। सिलेबस के अनुसार क्लीनिकल प्रैक्टिस नर्सिंग शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। इसके माध्यम से छात्र सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक रोगी देखभाल में लागू करना सीखते हैं- राजपाल सिंह यादव, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान नर्सिंग एसोसिएशन

बिना मान्यता के इस तरह संचालित कॉलेजों की जांच कराकर संबंधित विभाग को सूचना भेजी जाएगी। कॉलेज संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी- डॉ. योगेन्द्र शर्मा, सीएमएचओ