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Namo Bharat Train: राजस्थान के अलवर में कब तक चलेगी हाईस्पीड ‘नमो भारत’ ट्रेन? नया अपडेट आया सामने

Alwar-Delhi Namo Bharat Train: दिल्ली से अलवर के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी का सपना देख रहे अलवर के लोगों को अभी 5 साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

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अलवर

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Anil Prajapat

Feb 20, 2026

Alwar Namo Bharat Train

Photo: AI generated

Alwar Namo Bharat Train: अलवर। दिल्ली से अलवर के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी का सपना देख रहे अलवर के लोगों को अभी 5 साल और इंतजार करना पड़ सकता है। ‘नमो भारत’ ट्रेन यानी रैपिड रेल पहले चरण में दिल्ली से बावल के बीच ही संचालित होगी। अलवर को इस प्रोजेक्ट में तीसरे नंबर पर शामिल किया गया है। वर्ष 2026 तक इस ट्रेन का लाभ अलवर के लोगों को मिलना था, लेकिन निराशा हाथ लगी।

इस प्रोजेक्ट की ताजा स्थिति जानने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता चर्चित कौशिक ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को पत्र लिखा, जिसका जवाब देते हुए कार्यकारी महानिदेशक आरपी कोशार ने बताया कि स्टेज-प्रथम दिल्ली (सराय काले खां) से बावल तक के सेक्शन को पहले चरण में लागू किया जाएगा। इसके बाद के चरणों में बावल-एसएनबी-सोतानाला और अंत में एसएनबी-अलवर सेक्शन पर काम होगा।

आरआरटीएस कॉरिडोर का कार्य वर्ष 2026 तक तीनों चरणों में पूरा करने का लक्ष्य तय हुआ था, लेकिन विभाग इस वर्ष तक बावल तक के सेक्शन को ही पूरा करने की बात कह रहा है। अलवर आते-आते करीब 5 साल और लग सकते हैं। दूसरी ओर नेता अपने भाषणों के जरिए हाईस्पीड ट्रेन के सपने दिखा रहे हैं, जो पांच साल में पूरे नहीं हो पाए और अभी इतना ही समय और लग सकता है।

कुल लंबाई करीब 164 किमी

वर्ष 2018 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने रैपिड रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसे दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर नाम दिया गया था। यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर गुरुग्राम, रेवाड़ी और शाहजहांपुर-नीमराना-बहरोड़ से होते हुए अलवर तक आना है। इसकी कुल लंबाई लगभग 164 किमी है। दिल्ली से अलवर के बीच की दूरी 104-117 मिनट में पूरी होनी है।

2021 से फाइलों में अटका प्रोजेक्ट

दस्तावेजों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि जुलाई-2021 में भी एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने इसे तीन चरणों में बांटा था। उस समय भी स्टेज-3 (एसएनबी से अलवर) के लिए व्यवहार्यता अध्ययन की बात कही गई थी। पांच साल बीत जाने के बाद भी वर्ष 2026 के पत्र में अलवर का हिस्सा अभी भी बाद के चरणों में ही है। ऐसे में निकट भविष्य में रैपिड रेल (नमो भारत) की सुविधा केवल बावल (हरियाणा बॉर्डर के पास) तक ही मिल पाएगी।

नौकरी करने वालों को होता लाभ, बढ़ता पर्यटन

अलवर के हजारों युवा गुरुग्राम, दिल्ली, नोएडा कंपनियों में जॉब कर रहे हैं। अगर यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता, तो उन्हें लाभ मिलता। साथ ही, पर्यटन को भी बड़ी राहत मिल सकती थी। एक्सपर्ट का कहना है कि पब्लिक कनेक्टिविटी के प्रोजेक्ट्स पर देरी होना भविष्य के लिए चिंताजनक है। ऐसे में अब सभी जनप्रतिनिधियों की पहली प्राथमिकता इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की होनी चाहिए।