इस पर्व को लेकर सुहागिन महिलाएं पिछले कई दिनों से तैयारी में जुटी हुई है। बाजारों में गणगौर की खरीदारी की जा रही है। सौलह दिन से पीहर में रहकर गणगौर की पूजा कर रही नवविवाहिताएं गणगौर पर ईसर की सवारी निकालेंगी। इधर, इस बार बैंडबाजे पर रोक के चलते रौनक कम रहेगी। ज्यादातर जगह पर ढोल ही बुक किए गए हैं। इस दिन घर घर में गणगौर के पारम्परिक लोक गीत गोरिए गणगौर माता, गौर गौमती ईसर पूजे पार्वती को गाकर गणगौर की पूजा की जाएगी। सिंजारा पर महिलाओं ने शाम को गणगौर की सवारी निकाली, जिसमें ईसर व गौर को नगर भ्रमण करवाया गया। जिसमें बालिकाएं नाचते गाते हुए चल रही थी।