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राजस्थान में शिक्षा का स्तर, यहां 18 सालों से झोपड़ी में चल रहा है सरकारी स्कूल, आप भी जानिए कैसे पढ़ाई कर रहे है बच्चे

एक स्कूल 18 साल से दान की झोपड़ी में चल रहा है, लेकिन अभी तक किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

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अलवर

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Hiren Joshi

Apr 02, 2019

Government School Of Thanagazi Running In A Hut

राजस्थान में शिक्षा का स्तर, यहां 18 सालों से झोपड़ी में चल रहा है सरकारी स्कूल, आप भी जानिए कैसे पढ़ाई कर रहे है बच्चे

अलवर. राजस्थान में शिक्षा का स्तर कितना बेहतर हुआ है, उसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि प्रदेश के कई स्कूलों के पास अभी तक भवन नहीं है। ऐसा ही एक स्कूल अलवर जिले के थानागाजी में है। यह स्कूल 18 सालों से झोपड़ी में चल रहा है। थानागाजी क्षेत्र में ऐसा स्कूल है जहां न कमरे हैं और न ही पंखे लगाने लायक छत। मिट्टी की लिपाई के फर्श पर मवेशियों के गोबर आदि की खुद सफाई कर बोरी कटट्े बिछा बच्चे-शिक्षकों के साथ पढ़ाई करते हैं। शाम को छुट्टी होते ही मवेशी आकर बैठने लगते हैं और अगली सुबह फिर वही सिलसिला चल पड़ता है।
थानागाजी में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गुर्जरों की ढाणी का सच यही है। गांव काबलीगढ़ के पास स्थित गुर्जरों की ढाणी का राजकीय मिडिल स्कूल 18 वर्षों से घास-फूस की झोपड़ी में चल रहा है। यह झोंपड़ी भी सरकार की नहीं, बल्कि एक गरीब किसान भगवान सहाय गुर्जर की है। जिसने सिर्फ इस गरज से स्कूल को झोंपड़ी दान की, ताकि स्कूल बंद होने से गांव के बच्चे पढ़ाई से वंचित नहीं रह जाएं।

आठवीं तक कर दिया क्रमोन्नत

स्कूल को इसी हाल में 2008-09 में देवनारायण योजना में मिडिल स्तर तक क्रमोन्नत भी कर दिया गया। वर्ष 2001 में राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूल के रूप में इसे शुरू किया था। करीब 78 बच्चों से शुरु हुआ स्कूल संसाधनों की कमी के चलते घट रही विद्यार्थी संंख्या के कारण अब वर्तमान में महज 25 बच्चों में सिमट गया है। यह स्कूल वर्ष 2001 से 2005 तक गांव के लल्लू राम गुर्जर की झोंपड़ी में चलता था, लेकिन लल्लू राम ने 2005 में झोंपड़ी की जगह बेच दी।
गरीब किसान भगवानसहाय गुर्जर ने अपनी झोंपड़ी दान में दी, तब से यह स्कूल भामाशाह भगवान सहाय गुजर की झोंपड़ी में चल रहा है। हाल ही में इसी भामाशाह भगवान सहाय गुर्जर ने इस स्कूल के भवन के लिए भी अपनी जमीन में से 500 वर्ग गज भूमि स्कूल के नाम दान दी है ,जिसका ग्राम पंचायत ने पट्टा जारी कर दिया। यहां प्रधानाध्यापक सहित 2 शिक्षकों का स्टाफ है। प्रशासनिक दस्तावेज और जरूरी सामान समेट कर हर शाम एक बक्से में बंद कर रख दिए जाते हैं।

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