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अलवर जिले की प्यास भूजल पर निर्भर, पानी पहुंचा रसातल में, जिले में बारिश का आंकड़ा 23 फीसदी घटा, भूजल दोहन रिर्चाज से दोगुना हुआ

बारिश में कमी और भूमि से पानी का दोहन बढ़ने से पूरे जिले में भूजल रसातल में पहुंच चुका है। औसतन प्रतिवर्ष 3 मीटर भूजल में गिरावट दर्ज की जा रही है।

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अलवर

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Hiren Joshi

Apr 21, 2022

अलवर जिले की प्यास भूजल पर निर्भर, पानी पहुंचा रसातल में, जिले में बारिश का आंकड़ा 23 फीसदी घटा, भूजल दोहन रिर्चाज से दोगुना हुआ

अलवर जिले की प्यास भूजल पर निर्भर, पानी पहुंचा रसातल में, जिले में बारिश का आंकड़ा 23 फीसदी घटा, भूजल दोहन रिर्चाज से दोगुना हुआ

अलवर. प्रदेश में अलवर जिला संभवत: इकलौता है, जहां कोई भी सतही जल परियोजना नहीं है और पूरे जिले की पानी की प्यास बुझाने का जिम्मा केवल भूजल पर है। इन दिनों जिले में बारिश का प्रतिशत प्रदेश में सबसे ज्यादा गिरकर 23 तक पहुंच चुका है, वहीं प्रतिवर्ष जमीन में रिचार्ज हाे रहे पानी की तुलना में भूजल दोहन बढ़कर दोगुना एक लाख 29 हजार 400 हैक्टेयर मीटर पानी तक पहुंच गया है। पेयजल व सिंचाई समस्या निराकरण के लिए सरकार स्तर पर प्रस्ताव तो खूब बने, लेकिन इनमें से धरातल पर एक भी नहीं आ सका।

जिले में पानी की मांग निरंतर बढ़ रही है, पानी की उपब्धता में कमी आ रही है। इसकी वजह पानी उपलब्धता मुख्य स्रोत भूजल होना है। हर वर्ष बारिश में कमी और भूमि से पानी का दोहन बढ़ने से पूरे जिले में भूजल रसातल में पहुंच चुका है। औसतन प्रतिवर्ष 3 मीटर भूजल में गिरावट दर्ज की जा रही है। पूरा अलवर जिला डार्क जोन में होने से लोगों को अब जमीन से भी पानी मिलना मुश्किल होने लगा है। वैसे तो सरकार की ओर से अलवर में सतही जल परियोजना के लिए सिलीसेढ़, चम्बल, यमुना से पानी लाने के प्रस्ताव बने, लेकिन ये फाइलों से बाहर नहीं निकल सके। इन दिनों इस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट को लेकर केन्द्र व राज्य सरकार के बीच मुंह जुबानी जंग हो रही है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने को कोई तैयार नहीं दिखता।

एक दशक में 35 मीटर भूजल में गिरावट

भूजल विभाग के अनुसार जिले में भूजल स्तर पिछले 10 सालों में 35 मीटर नीचे जा चुका है। प्रतिवर्ष 3 मीटर भूजलस्तर कम हो रहा है। बानसूर में भूजल स्तर दस सालों में 28 मीटर नीचे गया है। इसके अलावा कोटकासिम व मुण्डावर में भी करीब 15 मीटर से अधिक भूजल जमीन के नीचे पहुंच गया है। बहरोड़ में भूजल 100 मीटर से नीचे पहुंच चुका है।

जिले में बरसात भी हो रही कम

केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अलवर जिले में बीते एक दशक की तुलना में वर्ष 2020-21 में 23.1 फीसदी कम बरसात हुई है। प्रदेश में बारिश में सबसे ज्यादा कमी अलवर जिले में ही आई है। अलवर में वर्ष 2011 से 2020 तक औसतन 551.37 मिमी बरसात हुई है। वहीं 2020-21 में 509.47 मिमी बारिश हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1901 से 1970 तक अलवर में सामान्य बारिश 626 मिमी हुआ करती थी, उसमें भी 22.87 प्रतिशत की कमी आई है।

हर साल 617 अरब लीटर पानी का दोहन हो

जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अलवर जिले में प्रतिवर्ष करीब 617 अरब लीटर भूजल का ही दोहन होना चाहिए। जल शक्ति मंत्रालय की डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज ऑफ़ इंडिया 2020 की रिपोर्ट के अनुसार अलवर जिले में प्रतिवर्ष 68,073.46 हेक्टेयर मीटर पानी रिचार्ज होता है। वहीं 1 लाख 29 हजार 400 हेक्टेयर मीटर पानी जमीन से निकाला जाता है। यानि अलवर जिले में प्रतिवर्ष 680.734 अरब लीटर से ज्यादा पानी रिचार्ज होता है और 1294 अरब लीटर पानी धरती से निकाला जा रहा है। इनमें से सबसे ज्यादा 1116 अरब लीटर से अधिक पानी खेती के लिए निकाला जाता है। इसके बाद घरेलू कार्यों के लिए 127 अरब और उद्योगों के लिए 50 अरब लीटर पानी हर साल जमीन से निकाला जा रहा है। इस तरह कुल मिलाकर 1294 अरब लीटर पानी हम धरती से निकाल रहे हैं।