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अलवर की राजनीति में अभी भी दूर है जिले की आधी आबादी, जानिए क्या है वजह

अलवर की राजनीति की चर्चा इन दिनों पूरे देश में चर्चित है, लेकिन अलवर की आधी आबादी अभी भी राजनीति में दूर है।

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अलवर

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Jyoti Sharma

Jan 26, 2018

half population of alwar is away from politics of district

अलवर. आजादी के सात दशक बाद भी अलवर की राजनीति में महिलाओं को कोई खास पहचान नहीं मिल पाई। आजादी के बाद से अब तक हुए विभन्न चुनावों में महिला प्रत्याशियों की संख्या चंद ही रही है। घर परिवार व सामाजिक बंदिशों के बावजूद जिन महिलाओं ने राजनीतिक क्षेत्र में कदम बढ़ाया उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। समय बीतने के साथ ही राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं ने कदम तो बढ़ाया लेकिन अभी भी उन्हें वो मुकाम हासिल नहीं हो सका है, जिसकी वो हकदार है। वर्तमान में शहर में जिला प्रमुख, नगर परिषद उपसभापति के पद पर महिला ही हैं। साथ ही जिले मे कई महिलाएं प्रधान तथा सरपंच, पंच के रूप में राजनीतिक राह को प्रशस्त कर रही हैं।

1957 में पहली बार जीता विधानसभा चुनाव

अलवर विधानसभा में 1957 में कांग्रेस ने दो महिला प्रत्याशी को टिकिट दिया। रामगढ़ से गंगा डाटा चुनाव जीती और बहरोड से शांति गुप्ता जो कि लाला काशीराम की पुत्री व नारायणदत्त की पत्नी थी। इसके बाद 1962 में रामगढ़ से उमा माथुर को टिकिट दिया और वो जीत गई। इसके बाद 1967 में अलवर से उमा माथुर रामानंद अग्रवाल से चुनाव हार गई। 1972 व 1977 में भी किसी महिला को टिकिट नहीं दिया गया। 1993 में मुंडावर से मीना अग्रवाल बीजेपी से चुनाव जीती । इनके साथ निर्दलीय प्रत्याशी आशा शर्मा भी खड़ी हुई लेकिन वो हार गई। 1980 में अलवर में मध्यावधि चुनाव हुए लेकिन कोई महिला खड़ी नहीं हुई। 1985 में कांग्रेस के मास्टर भोलानाथ की पत्नी पुष्पा शर्मा को टिकिट दिया। इन्होंने जीतमल जैन को हराया ओर विजयी रहा। 1990 में कोई महिला प्रत्याशी नहीं थी। 1998 में बीजेपी से मीना अग्रवाल को टिकिट दिया लेकिन वो हार गई। इसी चुनाव में बहादरपुर से कांता आहूजा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ी और हार गई। 1998 में मुंडावर से रेणू यादव ने लोकजन शक्ति पार्टी से चुनाव लड़ा और हार गई। 1998 में रामगढ़ से विमलादेवी चुनाव लड़ी और हार गई। 2003 में बीजेपी से पुष्पा गुप्ता व निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमारी मीनाक्षी और रामगढ़ से सुमन मजोकर चुनाव में खड़ी हुई और हार गई। 2008 में अलवर से पुष्पा गुप्ता, लक्ष्मणगढ़ से शीला मीणा व मुंडावर से आशा स्वामी व अनिता चौधरी चुनाव में खड़ी हुई। 2013 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीतकौर सागवान व अलवर ग्रामीण से राजपा से बिमला उमर चुनाव में खड़ी हुई लेकिन हार गई। 2013 में ही राजगढ़ से गोलमा देवी ने चुनाव लड़ा और विजयी रही। बानसूर से शकुंतला रावत चुनाव लड़ी और जीत गई। थानागाजी से उर्मिला योगी चुनाव लड़ी और हार गई। भाजपा से सुनीता मीणा व कांग्रेस से शीला मीणा ने भी चुनाव लड़ा कठूमर से बसपा से कमला बैरवा व गीता व पिंकी ने चुनाव लड़ा।