कोरोना से अपनी मां को खोने के बाद से गौरव चौहान गहरे सदमे में है। पत्रिका से बातचीत करते हुए गौरव रोते हुए बोला कि उसने अपनी मां के इलाज के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। पूरे एनसीआर में उसने अस्पतालों में सम्पर्क किया, लेकिन उन्हें किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिला। 20 अप्रेल को अलवर के एक निजी अस्पताल में बेड मिलने पर मां को भर्ती कराया। उनकी मां के लंग्स 70 प्रतिशत संक्रमित हो गए थे। उन्हें वेंटीलेटर की जरुरत थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने वेंटीलेटर उपलब्ध नहीं कराया। वह देर रात तक पूरे अलवर के अस्पतालों में भटकता रहा, लेकिन किसी ने वेंटीलेटर उपलब्ध नहीं कराया। यदि वेंटीलेटर मिल जाता तो शायद उसकी मां की जान बच सकती थी।