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राजस्थान के इस शहर का कचरे में बीत गया पूरा एक साल

अलवर शहर का बीता एक वर्ष कचरे में बीत गया। यहां न तो ठीक ढग़ से सफाई हुई और न ही इसको लेकर कोई व्यवस्था की गई।
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अलवर

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Dharmendra Yadav

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Updated: 28 Dec 2017, 2:50 PM IST

heavy garbage in alwar city of rajasthan

अलवर शहर के 4.5 लाख लोगों का साल 2017 कचरे में ही बीत गया। जिसकी बदबू हमेशा सांसों में शामिल रही। बीमारियों से जूझते रहे। कइयों की मौत भी हो गई। जिम्मेदार नगर परिषद, जिला प्रशासन और शहर के जनप्रतिनिधि यह तमाशा देखते रहे। तभी तो न सफाई का ठेका कर सके और न डोर-टू-डोर कचरा उठवा सके।

जबकि हर माह कर्मचारियों की तनख्वाह व सफाई के ठेके पर करीब 80 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। फिर भी जनता को तनिक भी सफाई का अहसास नहीं हुआ। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को सबसे अधिक ठेंगा अलवर शहर के जिम्मेदार प्रशासन ने दिखाया है, जिसका सबूत पूरा शहर है। आज भी कहीं भी चले जाएं, गंदगी के ढेर में मुंह मारते पशु मिल जाएंगे। स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाने का प्रमाण चाहिए तो स्वच्छता की रैंकिंग देख लो।

पहले सर्वे में 354 और दूसरे सर्वे में 364वीं रैंक अलवर की रही है। मौजूदा हालातों में आगे आने वाले नए सर्वे में और पीछे जाना करीब-करीब तय है।

कचरा उठाया नहीं जलाया ज्यादा

सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के आदेशों के विपरीत अलवर शहर में कचरा उठाने से ज्यादा जलाया ज्यादा गया है। शहर में आए दिन कहीं न कहीं कचरा जलता मिलता है। कभी कचरा पात्रों में तो कभी सड़क के किनारे। नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारियों के सामने एेसा होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। जनता की सांसों में जहर घोला जा रहा है।

सफाईकर्मी भर्ती की सुध नहीं

पूरे साल में अलवर नगर परिषद में अटकी पड़ी सफाई भर्ती पर कोई काम नहीं हुआ। जो कि पिछली सरकार के समय से अटकीपड़ी है। जबकि सफाईकर्मी भर्ती पक्रिया पूरी हो गइ्र्र। न मौजूदा सरकार कोई नई भर्ती लेकर आई। जिससे पूरे जिले में सफाइ्र्र व्यवस्था चौपट है। आज से एक दशक पहले सभी जगहों पर देागुने से अधिक सफाईकर्मी थे। लेकिन अब नहीं हैं।


जिले भर में गंदगी के हाल


अलवर शहर ही नहीं नगर पालिका व ग्राम पंचायतों में भी सफाई की कोई कार्य योजना नहीं होने के कारण गंदगी का आलम है। सार्वजनिक जगहों पर भी नियमित रूप से सफाई नहीं हो रही है। कचरा व पॉलीथिन ढेर के रूप मे पड़ा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौच से मुक्त करने में भी पीछे हैं। कई एेसी ग्राम पंचायतें भी हैं जिनको ओडीएफ कर दिया। उसके बावजूद वहां खुले में शौच आम बात है।