अलवर शहर के 4.5 लाख लोगों का साल 2017 कचरे में ही बीत गया। जिसकी बदबू हमेशा सांसों में शामिल रही। बीमारियों से जूझते रहे। कइयों की मौत भी हो गई। जिम्मेदार नगर परिषद, जिला प्रशासन और शहर के जनप्रतिनिधि यह तमाशा देखते रहे। तभी तो न सफाई का ठेका कर सके और न डोर-टू-डोर कचरा उठवा सके।