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हिन्दी दिवस : जिस राजा ने Rolls Royce से साफ कराई थी शहर की सडक़ें, उसी राजा ने हिंदी को सबसे पहले दिया सम्मान

Hindi Diwas: हिंदी को एक शताब्दी पूर्व ही अलवर के महाराजा ने राजभाषा का दर्जा दे दिया था

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Sep 14, 2020

Hindi Diwas: Maharaja Jaisingh Declared Hindi As Official language

हिन्दी दिवस : जिस राजा ने Rolls Royce से साफ कराई थी शहर की सडक़ें, उसी राजा ने हिंदी को सबसे पहले दिया सम्मान

अलवर. हिन्दी को देश में राजभाषा के रूप में स्थापित कराने के लिए पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अलवर में हिन्दी को एक शताब्दी पहले ही राजभाषा का दर्जा मिल गया था। अलवर जिले ने ही हिंदी को देश में पहले ही सर्वोच्च सम्मान दिया था। राज काल के समय ही इसके विकास के लिए नियम तय कर दिए गए थे।

इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने बताया कि महाराजा जयसिंह ने हिन्दी को 1908 में राजभाषा घोषित किया और उसके विकास के लिए नियम बनाए, निरन्तर विकास की कहानी के गजट प्रकाशित होते रहे। जिसमें जून 1931 का गजट विशेष उल्लेखनीय है। इससे पूर्व अलवर जिले में हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी भाषाओं का बोलबाला हमेशा से रहा है। महाराजा जयसिंह ने हिन्दी को रोजगार की भाषा की मान्यता दी थी।वर्ष 1908 में अलवर पूर्व रियासत में तत्कालीन शासक जयसिंह ने हिन्दी लिपी में राजकार्य करने के आदेश जारी कर हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया था।

अलवर के इतिहास की जानकारी रखने वाले इतिहासविदों के अनुसार राजभाषा हिन्दी को मान दिलाने के मामले में अलवर शुरू से अग्रणी रहा है। अंग्रेजों के शासन के दौरान ही अलवर में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा प्रदान कर दिया गया था। पूर्व राजघराने के शासक जयसिंह ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने में अग्रणी पहल की।

हिन्दी का मान बढ़ाया

अलवर पूर्व रियासत ने हिन्दी को न केवल कामकाज की भाषा घोषित किया, बल्कि वर्ष 1915 में हिन्दी का मान भी बढ़ाया। पूर्व शासक ने इस दौरान हिन्दी लिपी में राजकार्य को अनिवार्य कर दिया। उस दौरान रियासतकालीन, न्यायिक व अन्य कामकाज में पूरी तरह हिन्दी का उपयोग होने लगा। इसी प्रयास से अलवर में हिन्दी राजभाषा के रूप में स्थापित हो पाई।