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प​क्षियों की बीट से कैसे उग जाते हैं फूल

अलवर. सरिस्का में इस समय प्रवासी पक्षी कई देशों से पहुंच रहे हैं। इस बार मई-जून में आने वाले पक्षी कई प्रजातियों के पुष्प लेकर आ रहे हैं। यानी उनकी बीट के जरिए विदेशी फूलों के बीज यहां तक पहुंच रहे हैं, जिससे पौधे उगे और फूल खिल रहे हैं। प्रवासी पक्षियों की आवक इसी तरह रही तो सरिस्का में वन्य जीवों के अलावा ये पुष्प भी आकर्षित करेंगे।

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अलवर

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susheel kumar

Jun 21, 2023

प​क्षियों की बीट से कैसे उग जाते हैं पौधे

प​क्षियों की बीट से कैसे उग जाते हैं पौधे

श्रीलंका, बांग्लादेश से आ रहे प्रवासी पक्षी सरिस्का में खिला रहे क्रिनम प्रजाति के पुष्प
- मई-जून माह में आते हैं यूरेशियन गोल्डन ओरियल, इनकी बीट से यहां उग रहे पुष्प

- धीरे-धीरे बढ़ रहे इनके पौधे, विशेषज्ञ मान रहे पक्षियों की आवक ऐसे ही रही तो पांच साल में खिलेंगे बहुत फूल


अलवर. सरिस्का में इस समय प्रवासी पक्षी कई देशों से पहुंच रहे हैं। इस बार मई-जून में आने वाले पक्षी कई प्रजातियों के पुष्प लेकर आ रहे हैं। यानी उनकी बीट के जरिए विदेशी फूलों के बीज यहां तक पहुंच रहे हैं, जिससे पौधे उगे और फूल खिल रहे हैं। प्रवासी पक्षियों की आवक इसी तरह रही तो सरिस्का में वन्य जीवों के अलावा ये पुष्प भी आकर्षित करेंगे।
श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश आदि देशों से प्रवासी पक्षी मई-जून माह में सरिस्का पहुंचते हैं। यहां वह प्रजनन काल पूरा करते हैं और अपना कुनबा बढ़ाकर लेकर जाते हैं। इस बार यूरेशियन गोल्डन ओरियल आदि पक्षी यहां पहुंचे हैं। उनके यहां आने के करीब डेढ़ माह बाद सरिस्का की जमीन पर कई तरह के फूल देखे गए। यहां के गाइड कहते हैं कि प्रवासी पक्षी अपने यहां उगले वाले पुष्पों का सेवन करते हैं। वहां से चलकर जब यहां पहुंचते हैं तो वह बीट आदि करते हैं। ऐसे में उन पुष्पों के बीज यहां उग रहे हैं। ये पुष्प क्रिनम जेलेनिकम, लैटिफोलियम प्रजाति के बताए जा रहे हैं जिनकी उम्र दो माह की होती है। सफेद व गुलाबी रंग का यह पुष्प आकर्षित होता है। यदि बड़े एरिया में यह लगाया जाए तो इसका मूल्य भी बाजार में अच्छा मिलता है। सीनियर गाइड रामौतार मीणा कहते हैं कि इस बार क्रेनम प्रजाति के पुष्प सरिस्का में दिखे हैं जो पर्यटकों को भा रहे हैं।

प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। कुछ माह बाद वह अपने देश लौट जाते हैं। यूरेशियन गोल्डन ओरियल, फ्लाईकैचर आदि पक्षी यहां ठिकाना बनाए हुए हैं। उनकी आवाज भी मुधर है।

- आरएन मीणा, मुख्य वन संरक्षक अलवर