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सैकड़ों बीघा भूमि बंजर होने के कगार पर

खेती के लिए बरसात पर ही निर्भरता

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सैकड़ों बीघा भूमि बंजर होने के कगार पर

अलवर. बहरोड़ क्षेत्र के निभोर गांव में पानी की कमी के कारण सूनसान पड़े खेत।

अलवर. बहरोड़ क्षेत्र में गिरते हुए भूजल स्तर का खामियाजा किसानों को भी भुगतना पड़ रहा है। उपखंड क्षेत्र के हरियाणा सीमा से लगते हुए गांवों में पानी की कमी से खेतों में हरियाली की जगह पर सूनापन नजर आ रहा है।
हरियाणा सीमा से लगते हुए आधा दर्जन गांवों में किसानों के लिए खेतो में बिजाई का प्रमुख आधार बारिश ही बन रह गई है। क्षेत्र में लगातार गिरता जा रहा भूजल स्तर को लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे है। उपखंड क्षेत्र के निभोर, अनन्तपुरा, जखराना, भगवाड़ी, बालपुरा, गुवाना, बालपुरा गांवों में किसानों के सामने खेतों में फसलों को पानी देने की विकट स्थिति सामने खड़ी है। क्षेत्र में फसल बुवाई से पहले अगर अच्छी बरसात हो जाए तो किसान सरसों व चने की फसलों कि बुवाई कर देते है। अगर समय पर बरसात नहीं हुई तो उनके खेत सुनसान पड़े रहते है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि फसलों में पानी देने के लिए ही नहीं कई जगह पर तो उन्हें पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो रहा है। किसानों ने बताया कि क्षेत्र में हर वर्ष बरसात का स्तर गिरता जा रहा है।
इधर जखराना गांव निवासी व किसान वीरेन्द्र यादव का कहना है कि क्षेत्र में लगातार भूजल स्तर के गिरने से किसान एक ही फसल कर पाते है।ऐसे में वह बाहर पलायन करने को मजबूर है।
उधर, निभोर गांव निवासी सुरेश कुमार का कहना है कि क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों व राज्य सरकार अगर कारगर प्रयास नहीं करेंगी तो किसान बर्बाद हो जाएगा। किसान की भूमि बंजर हो जाएंगी। किसानों को वर्ष में दो फसल करने का लाभ नहीं मिल रहा है।


किसानों की मांग नहरी तंत्र हो विकसित

अच्छी बरसात नहीं होने से उनके लिए पशुओं को पानी पिलाने के लिए मुश्किल पैदा हो जाती है। इस स्थिति में वह खेतो में अगर फसल बुवाई कर भी दे तो उनमें समय पर पानी कहा से दे। क्षेत्र में जिन किसानों ने खेतो में ट्यूबवेल खुदवा रखी है वह भी सिर्फ अपनी जरूरत अनुसार ही खेतो में बीज डालते है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को खाने के लिए अनाज व पशुओं के लिए चारा बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है। पानी के अभाव में क्षेत्र के लोग सिर्फ खरीफ की फसल तक ही सीमित रह गए है। किसानों का कहना है कि अगर राज्य सरकार व जनप्रतिनिधियों द्वारा हरियाणा की तर्ज पर क्षेत्र में नहरी तंत्र लागू किया जाए तो किसानों को बाहर पलायन करने के मजबूर नही होना पड़े।