
husband and wife reunited
राधा आज बहुत खुश दिखाई दी, खुशी से उसकी आंखों में आंसू आ गए। एेसा हो भी क्यों ना, आखिर छह माह बाद उसे अपना पति मिल गया। उसका संसार फिर से बस गया। राधा की बूढ़ी मां के चेहरे पर आई चमक दूर से ही दिखाई दे रही थी। उसकी बेटी का घर फिर से बस गया। कभी वह वकील को दुआ दे रही थी तो कभी जज को। यह नजारा था शनिवार को अलवर मुख्यालय पर न्यायालय में लगाई गई लोक अदालत का। जिसमें मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट इसरार खोखर ने पति पत्नी के बीच राजीनामा करवाया तो दोनों साथ रहने का राजी हो गए।
छह माह पहले राधा ने पति पर घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवाया था। मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में दोनों ने एक दूसरे को वरमाला डाली तो सबने उन्हें शुभकामनाएं दी। इस खुशी में मिठाई भी बांटी गई। पति पत्नी ने कहा कि दूर रहने से पति पत्नी के रिश्ते बिगड़ते हैं, पास रहकर ही एक दूसरे को समझा जा सकता है।
16937में से 2848 का निपटारा
जिले के सभी न्यायालयों में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई। जिला न्यायालय से मिली जानकारी के अनुसार इसमें 16937 मामले राजीनामे के लिए रखे गए। राष्ट्रीय लोक अदालत के चलते सुबह से ही कोर्ट परिसर में पक्षकारों व वकीलों की भारी भीड़ रही। समझाईश के लिए पैरालीगल वॉलिन्टेयरों की टीम बनाई गई थी।
प्राधिकरण के अध्यक्ष हेमंत कुमार जैन ने बताया कि लोक अदालत में विभिन्न स्तर के सभी न्यायालयों, अधिकरणों में लंबित राजीनामा योग्य सभी प्रकरणों व प्रिलिटिगेशन मामलों का आपसी समझाईश व राजीनामा के माध्यम से निस्तारण किया गया। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में 1066 न्यायिक प्रकरणों व 1355 राजस्व प्रकरणों व 416 प्रिलिटिगेशन के मामलों सहित कुल 2848प्रकरणों का निस्तारण किया गया।
इस लोक अदालत के माध्यम से 72 पारिवारिक विवादों का निस्तारण राजीनामे से हुआ। इसमें 10 जोडें पति पत्नी के थे जो राजीनामे के बाद बहुत खुश दिखाई दे रहे थे। प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव प्रवीण मिश्रा ने सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों व अन्य सभी को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
अदालत में ही चुका दिया लोन
किशन कुमार ने निजी बैंक से वर्ष 2007 में ऋण लिया था। 15 हजार रुपए का चैक पहले ही दे दिया था। वह बाकी की राशि चुकाना भूल गया। कंपनी ने इस पर मुकदमा कर दिया। आज उसे लोक अदालत में बुलाया तो उसने 8 हजार रुपए तत्काल चुकाने की बात कहीं। जिसे कंपनी ने मान लिया और मोके पर ही कम पैसे में ही राजीनामे से मामला निपट गया।
चेक मिला तो खिला चेहरावर्ष 2015में सरजू के साथ दुर्घटना हुई । इससे शरीर चोट ग्रस्त हो गया। उसने मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम के तहत अदालत में न्याय की मांग की। शनिवार को लगी लोक अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट रूपा गुप्ता ने कंपनी और सरजू के साथ बातचीत कर मामले का निपटारा करवाया और मौके पर ही सरजू को चैक दे दिया। जिससे वह बहुत खुश था ।
Published on:
12 Feb 2017 07:53 am
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