
अलवर. जिले के मालाखेड़ा उपखंड में रियासत कालीन जयसमंद बांध के भरने पर करीब 60 गांव के किसान रबी की फसल की सिंचाई कर आर्थिक रूप से सन 2009 तक संपन्न होते रहे। इस वर्ष तक बारिश का पूरा पानी बारा बियर से जयसमंद बांध पहुंचने पर वह लबालब रहता था। जहां सिंचाई विभाग की ओर से यहां पर मछली पालन होने लगा। आज से करीब 15 से 18 वर्ष पहले तक जयसमंद बांध आबाद रहा। लेकिन बारिश के अभाव तथा चैनल सहित अन्य स्थानों पर अतिक्रमण होने से यह बर्बादी के कगार पर पहुंच गया।
इस वर्ष तीन बार जयसमंद बांध में विभिन्न रास्तों से बारिश का पानी पहुंचा है। जिससे चहूंऔर हरियाली छाई हुई है। जल संसाधन सिंचाई विभाग के एक्सईएन संजय खत्री ने बताया जयसमंद बांध से ग्राम पंचायत दादर, महुआ खुर्द, देसूला, भजीट, भूगोर, पलखड़ी, खानपुर जाट, सालपुर, केसरपुर, गुजुकी, गुंदपुर के गांव के अलावा बलाना, सालपुरी, मदनपुरी, रूपबास, नंगला चारण, पालका, महुआ, खाता का, मोरेडा, सोहनपुर, सामोला, बांदीपुरा, अलवर शहर, नांगल रतावत, राजस्व गांव में रबी फसल के लिए जयसमंद बांध से सिंचाई होती रही। सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार जयसमंद बांध का सीसीए 10322 एकड़ में फैला हुआ है।
जयसमंद बांध के भरने पर रबी फसल में सिंचाई
वर्ष सिंचाई एकड़ में
2003-4 1477.79
2005-6 970.70
2008-9 876. 92
पटवारी करते थे व्यवस्था
उस समय व्यवस्था सिंचाई विभाग में लगे हुए पटवारी करते रहे। बांध की मोरी खोलना बंद करने का कार्य भी जल संसाधन विभाग में लगे कर्मचारी करते थे। किसान हटिया खान, उमरुद्दीन, अमर सिंह यादव, बने सिंह, रामानंद गुप्ता, मोहनलाल, बलबीर सिंह आदि ने बताया कि राजा जयसिंह ने जयसमंद बांध का निर्माण कराया था। सिंचाई के दौरान पूरी नहर सुरक्षित थी। जयसमंद बांध से सिंचाई बंद होने के बाद वह बर्बाद हो गई। अतिक्रमण हो गया और अलवर जिले का ऐतिहासिक किसानों का मददगार बांध बर्बादी के कगार पर चला गया। नटनी का बारा से जयसमंद बांध, केसरपुर, बलाना तक बारिश का पानी पहुंचे, इसके लिए चैनल बनाई गई। ग्रामीण क्षेत्र में फसल सिंचाई के लिए पक्की नहरे का निर्माण किया गया। इसकी मॉनिटरिंग जल संसाधन विभाग के पास रही। इस मामले में संबंधित अधिकारियों से संपर्क का कई बार प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
Published on:
31 Jul 2024 08:16 pm
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