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भूमाफियाओं ने सरकारी भूमि पर प्लॉट काटकर 50-50 लाख के बेच दिए, अधिकारियों की मिलीभगत आ रही सामने

पिछले चार माह से प्लॉट काटे जा रहे थे जिसके प्लॉटों की रजिस्ट्री तहसील कार्यालय में स्वयं कर्मचारी व अधिकारी कर रहे थे। चार माह बाद प्रशासन को इसकी भनक लगी जब तक तो यहां काफी संख्या में प्लॉट बिक गए थे।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Dec 25, 2020

Illegal Plotting On Government Land In Alwar District

भूमाफियाओं ने सरकारी भूमि पर प्लॉट काटकर 50-50 लाख के बेच दिए, अधिकारियों की मिलीभगत आ रही सामने

अलवर. अलवर शहर में जयपुर सडक़ मार्ग पर जयंती फार्म हाउस के सामने रातों-रात प्लॉट काट दिए। लाखों की कीमत में बेचे गए इन प्लॉटों पर निर्माण कार्य शुरू हुए तो प्रशासन की नींद खुली। गुरुवार को तहसीलदार सहित यूआईटी के अधिकारी भारी पुलिस फोर्स के साथ यहां पहुंचे और उन्होंने निर्माण कार्य को रुकवाया।

गुरुवार को यूआईटी की अतिक्रमण निरोधक अधिकारी भानू श्री, तहसीलदार कमल पचौरी, पटवारी भाखेड़ा सीता मीणा, जवाहर लाल, नगर विकास न्यास के पटवारी नेमीचंद अन्य कार्मिक भी मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए अरावली विहार थाना अधिकारी जहीर अब्बास, एएसआई सुरता राम, पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता तथा क्यू आर टी टीम मौके पर मौजूद रही।

इस टीम के साथ आई जेसीबी ने यहां खुदाई कर दी। यहां हो रही प्लाटिंग के निशानों को मिटाया गया और जमीन समतल की गई। यह कार्रवाई करीब 2 घंटे तक चली। इस दौरान प्लॉट खरीदने वाले भी यहां पहुंच गए जिन्होंने इस कार्रवाई पर रोष जताया।

काफी संख्या में बिक गए प्लॉट-

जयपुर रोड पर स्थित तुलसी वाटिका में पिछले चार माह से प्लॉट काटे जा रहे थे जिसके प्लॉटों की रजिस्ट्री तहसील कार्यालय में स्वयं कर्मचारी व अधिकारी कर रहे थे। चार माह बाद प्रशासन को इसकी भनक लगी जब तक तो यहां काफी संख्या में प्लॉट बिक गए थे।

ग्राम पंचायत भाखेड़ा के राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार खसरा संख्या 263 से लेकर 275 तक करीब 2 हैक्टेयर से अधिक भूमि यानि 8 बीघा भूमि में प्लॉटिंग की हुई है । यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में खैरथल निवासी सिंघानिया परिवार के नाम से दर्ज है। यह ओमप्रकाश सिंघानिया के पुत्र अशोक कुमार, प्रमोद कुमार ,ललित कुमार, सुरेंद्र कुमार के नाम से खातेदारी की भूमि दर्ज रिकॉर्ड है। वही 2 गैर खातेदार भी इस राजस्व रिकॉर्ड में है जिसमें चंपा देवी पत्नी घनश्याम तथा जगमोहन पुत्र मदन मोहन ,इनके नाम एक 1 एयर भूमि गैर खातेदारी है। गैर खातेदारी भूमि होने की वजह से यह संपूर्ण खाते की भूमि 90-बी नहीं हो सकी थी।

पहले सोते रहे, तहसील व यूआईटी कर्मियों की मिलीभगत-

प्लॉट के खरीददारों ने बताया कि यहां काफी संख्या में प्लॉटों की रजिस्ट्री तहसील में हुई तो किसी ने इन्हें नहीं रोका। अब तो हमने 10 लाख से अधिक के तो किसी ने 50 लाख तक का प्लॉट लिया है और अब प्रशासन यह कार्रवाई कर रहा है। इसमें अलवर तहसील के अधिकारी व कर्मचारियों की मिली- भगत सामने आ रही है। तहसील के अधिकारी भू माफियाओं से मिलकर गुपचुप में अवैध प्लाटिंग होने देते हैं। अलवर तहसीलदार कमल पचौरी कहते हैं कि मुझे तो पता ही नहीं कि वहां क्यों कार्रवाई हुई। यह अवैध निर्माण रोकना तो यूआईटी का काम है।मैं तो मौका मजिस्ट्रेट था, इसलिए गया था। इसके लिए यूआईटी की अतिक्रमण निरोधक टीम काम कर रही है।नगर विकास न्यास तहसीलदार भाग्यश्री ने बताया क्षेत्र में भूमि रूपांतरण के बगैर हो रहे निर्माण कार्य को विभाग की ओर से सघन निरीक्षण कर रोका गया है।