
राजस्थान के इस हाई प्रोफाइल मामले में पुलिस ने तथ्यों को कुचलने का किया प्रयास, लगे गंभीर आरोप
अलवर. तीन साल पुराने हाई प्रोफाइल इन्दू अग्रवाल हत्या प्रकरण में नौकर को दोष मुक्त किए जाने के आदेश से एक बार फिर पुलिस जांच पर सवालिया निशान लग गए हैं।
किशोर न्याय बोर्ड ने अपने फैसले में कहा कि इस जघन्य अपराध में पुलिस अधिकारियों ने कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी से अनुसंधान नहीं किया। जांच अधिकारियों ने तथ्यों को कुचलने व दबाने का प्रयास किया। गवाहों के बयान भी रटे रटाए थे। ऐसा जांच अधिकारियों ने किस उद्देश्य से किया, यह वे ही जानते हैं। पूरे प्रकरण में जांच अधिकारियों ने जो भूमिका निभाई, इससे वे स्वयं संदेह के घेरे में आते हैं।
बोर्ड ने अपने फैसले में कहा कि प्रकरण में नौकर को मोहरा बनाकर पेश किया गया, जिसके खिलाफ आरोप प्रमाणित करने में जांच अधिकारी पूर्णतया विफल रहे हैँ। बोर्ड ने प्रकरण के निर्णय की एक प्रति पुलिस अधीक्षक को भेज मामले में संदिग्ध आचरण वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर प्रकरण में छूटे तथ्यों का अनुसंधान करा एक माह में प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जघन्य अपराध की नहीं जांची सत्यता
किशोर न्याय बोर्ड ने अपने फैसले में कहा कि प्रकरण में पुलिस के दोनों जांच अधिकारी काफी वरिष्ठ हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपराध की सत्यता नहीं जांची। जांच अधिकारियों ने व्यापारी अशोक अग्रवाल के घर व ऑफिस में सीसीटीवी कैमरों को लेकर कोई अनुसंधान नहीं किया। अशोक का उस समय कॉलेज जाना भी संदिग्ध प्रतीत होता है। पुलिस ने कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी बोर्ड के समक्ष विशलेषण के लिए पेश नहीं किए।
प्रकरण के मुख्य गवाह मृतका की पुत्री, अशोक के मैनेजर दिनेश, मृतका के मित्र व परिजनों से भी पूछताछ नहीं की गई। घटनास्थल के वीडियो भी पत्रावली में पेश नहीं किए गए। रस्सी व बैडशीट, मृतका के कपड़े, बालक की टीशर्ट पर मिले खून के धब्बों का मृतका के रक्त समूह से मिलान नहीं किया गया। इससे पुलिस के जांच अधिकारियों का आचरण व अनुसंधान संदेह से घिर जाता है।
Published on:
27 Jun 2018 09:28 am
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