8 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

International Family Day 2024: राजस्थान के इन घरों की चारदीवारी में छिपा है खुशियों का राज, जानें संयुक्त परिवारों के रोचक अनुभव

International Family Day 2024: छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद और बदलते वक्त के साथ संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं। मैं, मेरा पति और बच्चे यह सोच संयुक्त परिवारों पर भारी पड़ रही है।

2 min read
Google source verification

अलवर

image

Kirti Verma

May 15, 2024

ज्योति शर्मा
International Family Day 2024: छोटी-छोटी बातों को लेकर मतभेद और बदलते वक्त के साथ संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं। मैं, मेरा पति और बच्चे यह सोच संयुक्त परिवारों पर भारी पड़ रही है। इस सोच के चलते एकल परिवार का चलन बढ़ा है और संयुक्त परिवार की परंपरा लगभग खत्म हो रही है। ऐसे दौर में भी कई ऐसे परिवार हैं, जो एक साथ रह रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के मौके पर पढि़ए ऐसे ही चुनिंदा परिवारों की छोटी-छोटी कहानियां…

एकल परिवार को बेहतर मानने वाली युवा पीढ़ी इनसे ले सीख
सौ साल पुरानी हवेली में 20 सदस्यों का परिवार

शहर के चूड़ी मार्केट में सौ साल पुरानी हवेली। इसे बस्सी वालों की हवेली के नाम से जाना जाता है। इस हवेली में हजारीलाल का परिवार वर्ष 1937 से पहले से रह रहा है। 91 वर्षीय हजारीलाल के परिवार में 20 सदस्य हैं। पत्नी चंद्रकला के नाम पर ही इस हवेली का नाम चंद्र भवन रखा हुआ है। इस परिवार में हजारीलाल के तीन बेटे, तीन बहुएं, पौत्र, पौत्र बहू के साथ पड़पोती, पड़पोते एक साथ रहते हैं। हजारीलाल बताते हैं कि संयुक्त परिवार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सभी मिलकर मेरी देखभाल करते हैं। परिवार के सदस्य लोकेश खंडेलवाल बताते हैं कि नफा हो या नुकसान हम मिलकर उठाते हैं।

यह भी पढ़ें : 29 जून से शुरू होगी बाबा बर्फानी की यात्रा, रजिस्ट्रेशन करानेे वालों में युवा ज्यादा

एक ही चूल्हे पर बनता है 18 सदस्यों का खाना
अलवर शहर के कालाकुआं अरावली विहार 1- 544 निवासी पवन जैन चौधरी के परिवार में चार पीढ़िया एक ही घर में एक साथ रहती हैं। परिवार में 18 सदस्य है। सभी का खाना एक ही चूल्हे पर बनता है। सभी बहुएं मिलकर रसोई संभालती हैं। परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य विमला देवी करीब 80 साल की हैं। इनके चार बेटे, चार बहू, तीन पोते, चार पोतियां साथ रहते हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है। मां ने बताया कि पवन जब 32 साल के थे तो पिता की मृत्यु हो गई। परिवार टूटे नहीं इसलिए पवन ने भाइयाें को अपने साथ रखने का निर्णय लिया। पिता की सरकारी नौकरी सबसे छोटे भाई को दिलाई। पिता की मृत्यु पर दस लाख रुपए मिले, इससे एक भाई को बिजनेस करवाया। बाद में तीसरे भाई को भी बिजनेस करवाया। सब खुशी से रह रहे हैं। दो पोतियों की भी शादी हो गई है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी मधु जैन संभालती हैं।

संयुक्त परिवार में 15 सदस्य, एक ही रसोई
अलवर शहर के अशोका टाॅकीज के समीप बापू बाजार निवासी पूजा पालावत का परिवार भी संयुक्त परिवार की मिसाल है। इस परिवार में 15 सदस्य एक ही घर में रहते हैं और खाना एक ही रसोई में बनता है। वे बताती हैं कि हमें इस बात का गर्व है कि हम मिलकर रहते हैं। ससुर टीकमंचद पालावत और उनके तीन छोटे भाई मेरे चाचा ससुर और चाची सास भी हमारे साथ ही रहते हैं। परिवार में 2 बेटे, 2 बहू, 3 पोते और 1 पोती है। टीवी भी एक ही है। सभी एकसाथ बैठकर टीवी सीरियल देखते हैं। परिवार में कोई खुशी आए या परेशानी मिलकर बांटते हैं।