
अलवर. भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत गुरुवार को पुराना कटला जगन्नाथ मंदिर में गणेश पूजन के साथ हुई। इस अवसर पर भगवान गणेश को विवाह के लिए निमंत्रण दिया गया। पंडि़तों ने वेदमंत्र पढ़े। इस अवसर पर मंदिर में विशेष सजावट की गई थी। साथ ही भगवान जगन्नाथ व जानकी मैया के वैवाहिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है। सात जुलाई आषाढ़ शुक्ल दूज रविवार को दोज पूजन किया जाएगा।
सैकड़ों साल से निकल रही है भगवान की रथयात्रा
मंदिर के महंत धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि अलवर शहर में करीब 160 सालों से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जा रही है। पुराना कटला सुभाष चौक मंदिर करीब 260 साल से अधिक पुराना है। इस मंदिर में भगवान सीताराम जी, जगन्नाथ जी व जानकी मैया की सवारी बैंडबाजे व लवाजमे के साथ रूपबास पहुंचती है। यहां मेला भरता है। भगवान जगन्नाथ इंद्रविमान नामक रथ में सवार होकर भक्तों को दर्शन देते हुए माता जानकी को ब्याहने पहुंचते हैं।
एडीएम सिटी ने किया मंदिर का निरीक्षण
गणेश पूजन के साथ ही विवाह महोत्सव के कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही प्रशासन भी तैयारी में जुट गया है। एडीएम सिटी व एडीशनल एसपी हैड क्वार्टर ने गुरुवार की शाम को मंदिर का मुआयना किया और मेले की तैयारियों पर चर्चा की। नगर परिषद की ओर से मेला स्थल पर लगने वाली दुकानों के लिए अस्थाई आवंटन के टेंडर जारी कर दिए गए हैं। मेला स्थल पर वाहनों का ठेका देने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी हैं।
कैसे आएंगे भक्त, मंदिर के पास खोदी सडक़
जगन्नाथ महोत्सव के दौरान प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है। मंदिर के पास व मंदिर के पीछे की तरफ सडक़ को खोद दिया गया है। मंदिर में पीछे से आने वाला रास्ता ही बंद हो गया है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु ज्यादातर पुराने क्षेत्र के ही है। पिछले तीन दिनों से यहां के भक्त मंदिर में दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी जब मंदिर पहुंचे तो मंदिर कमेटी ने इस तरह की अव्यवस्था पर खेद व्यक्त किया।
निश्चल भक्ति भाव ही भगवान की प्राप्ति का रास्ता
अलवर. शहर के जेल चौराहा के समीप वीर सावरकर नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को रुक्मणी विवाह की कथा सुनाई गई। इस मौके पर रुक्मणी विवाह की झांकी भी दिखाई गई। पं. विजेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि निश्चल भक्ति भाव ही भगवान की प्राप्ति का रास्ता है। जिस रूप से भक्त भगवान को देखेगा भगवान उसी रूप में दिखाई देंगे। भगवान कण-कण में विराजमान है, लेकिन भक्त जिस रूप में देखेगा भगवान इस रूप में भक्त को दिखाई देंगे। वीर सावरकर नगर विकास समिति के अध्यक्ष महेंद्र गागल ने बताया कि कथा का समापन शुक्रवार को हवन-यज्ञ के साथ संपन्न होगा, इस मौके पर प्रसाद वितरित भी किया जाएगा।
‘कलियुग में हरि कथा का बड़ा महत्व’
सकट. नारायणपुर गांव के मुरली मनोहर मंदिर पर ग्रामीणों के सहयोग से चल रहे श्रीविष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन देते हुए कथा व्यास संत साईं राम ने कहा कि कलियुग में संत दर्शन व हरि कथा का बड़ा महत्व है। ये दोनों ही कई जन्मों के पुण्य प्रभाव जागृत होने पर प्राप्त होते है।
उन्होंने कहा कि जहां संत होते हैं, वही सारे तीर्थ निवास करते हैं। अभिमान व अहंकार से मनुष्य को दूर रहना चाहिए। ये दोनों कभी भी मनुष्य के पतन का कारण बन सकते है। क्रोध से सोचने व समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। हमेशा क्रोध पर काबू रखना चाहिए।
मुरली मनोहर चतुर्भुजजी महाराज मंदिर में बनी यज्ञ वैदी में यज्ञाचार्य पं. रामबाबू शर्मा ने यजमानों से वैदिक मंत्रोच्चारणों के साथ हवन सामग्री की आहुतियां दिलवाई। श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। कथा के दूसरे दिन गुरुवार को महर्षि मुनि महाराज की कथा का प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान भजनों पर महिला श्रद्धालुओं ने नृत्य किया।
Published on:
05 Jul 2024 05:34 pm
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