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नफरी के बिना जूझ रहा 63 गांवों के भार वाला कठूमर थाना—पढ़ें यह न्यूज

हालात ऐसे कि यहां पीने के पानी की भी नहीं व्यवस्था। एक पुलिसकर्मी के भरोसे ढाई हजार की आबादी की सुरक्षा।

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कठूमर. स्थानीय थाने की पुलिस नफरी की कमी से जूझ रही है। थाना क्षेत्र के तेरसठ गांवों की करीब पैसठ हजार की आबादी की सुरक्षा का काम केवल 27 पुलिसकर्मियों पर है। यानी ढाई हजार व्यक्तियों की सुरक्षा केवल एक पुलिस वाले के जिम्मे है। मुख्यालय के थाने में स्वीकृत पदों में से पचास फीसदी रिक्त चल रहे हैं, जबकि क्षेत्र की आधी आबादी महिलाओं की व्यवस्था थाने में दो महिला कांस्टेबलों पर हैं।

कठूमर कस्बे के थाने में 54 पद स्वीकृत हैं, जिनमें पुलिस निरीक्षक का एक पद, उप निरीक्षक के दो में से एक, सहायक उप निरीक्षक के छह में से चार, हैड कांस्टेबल के 10 में से छह, कांस्टेबल के 33 में से 10 पद रिक्त हैं। थाने में

कुल 27 पद भरे हुए हैं और पचास फीसदी खाली है। टीकरी चौकी पर स्वीकृत पांच पद भरे हुए हैं। इनमें एक दर्जन पुलिसकर्मी ऑफिस वर्क, अलवर आने-जाने, शहादत, प्रोटोकॉल आदि कामों में घिरे रहते हैंं। एक-दो छुट्टी पर रह जाते हैं। ऐसे में वास्तविकता में चौदह-पन्द्रह पुलिसकर्मी ही ड्यूटी पर रहते हैं।

ये गांव थाने के अधीन

कठूमर थाना सौंख, भदीरा, पिसई, बलदेव पुरा, तिगरिया, बायडा, रामनगर, अजीत पुरा, इंद्रावली, सेढू का नंगला, टिटपुरी, नंगला मतुआ नंगला धनसिंह, दुधेरी, बड़का, रेटा, रेटी, हनीपुर, हुल्याना, सामोली, मैथना, बरांडा, तसई आदि 63 गांवों तक फैला हुआ है। इनमें कई गांवों की दूरी 15 से 20 किमी है। अनेक गांव नदबई, नगर, खेरली थाने की सीमा को छू रहे हैं।

बुलानी पड़ती है आसपास की पुलिस

थाने में पुलिस नफरी की कमी के कारण बड़ी घटनाओं में स्थिति संभालने को लेकर आसपास के थानों की पुलिस बुलानी पड़ती है। दूसरी ओर पुलिसकर्मी जर्जर व जीर्ण-शीर्ण क्वार्टरों में रह रहे हैं। इनकी हालत इतनी खस्ता है कि कभी भी बडा हादसा हो सकता है। पुरुष जेल की छत का प्लास्टर उखड़ रहा है। बंदियों पर कभी भी इसकी गाज गिर सकती है। बाउंड्री वाॅल भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है।

फरियादी भी रहते परेशान

कठूमर कस्बे से तीन किमी दूर थाने पर पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। फरियादियों को पीने के पानी को तरसना पड़ता है। पुलिसकर्मी भी जैसे-तैसे कर पानी की व्यवस्था करते हैं।

यह बोले लोग

महिला डेस्क होनी चाहिए

अर्चना खंडेलवाल, निवासी कठूमर का कहना है कि महिलाएं दहेज, घरेलू हिंसा, उत्पीडन व अन्य घटनाओं की शिकार होती रहती हैं। इसलिए कठूमर थाने में महिला पुलिसकर्मी की संख्या बढ़नी चाहिए। थाने में अलग से महिला डेस्क भी होनी चाहिए।

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सीसीटीवी लगने चाहिए

चतर सिंह चौधरी, निवासी कठूमर के अनुसार कठूमर क्षेत्र में पुलिस की कमी है, मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगने चाहिए। गश्त भी लगातार होनी चाहिए।

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सुधार किया जाएगा

विधायक कठूमर रमेश खींची का कहना है कि थाने में नफरी के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री व गृह राज्य मंत्री को अवगत कराया जाएगा। क्षेत्र में कानून व व्यवस्था के लिए सभी थानों में नफरी व अन्य संसाधन बढ़ाए जाएंगे। महिला पुलिस की भी व्यवस्था की जाएगी।