6 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

खेरली, मालाखेड़ा, बड़ौदामेव, किशनगढ़बास व खैरथल की बदलेगी सूरत, होगा सुनियोजित विकास

अब सरकार 50 हजार की आबादी वाले कस्बों व शहरों में भी सुनियोजित विकास कराने जा रही है। इन शहरों का मास्टर प्लान बनेगा। आगामी 30 साल तक के इस विकास प्लान से इन शहर-कस्बों का नक्शा बेहतर होगा।

2 min read
Google source verification

अलवर

image

Umesh Sharma

Apr 06, 2026

अलवर. अब सरकार 50 हजार की आबादी वाले कस्बों व शहरों में भी सुनियोजित विकास कराने जा रही है। इन शहरों का मास्टर प्लान बनेगा। आगामी 30 साल तक के इस विकास प्लान से इन शहर-कस्बों का नक्शा बेहतर होगा। अनियोजित विकास नहीं होने से जनता को लाभ मिलेगा। विकास की योजनाओं को धरातल पर बेहतर तरीके से उतारा जा सकेगा। इस दायरे में मालाखेड़ा, बड़ौदामेव, खेरली, किशनगढ़बास, खैरथल समेत दर्जनभर कस्बे आएंगे। कुछ कस्बों के मास्टर प्लान पर डीटीपी कार्यालय अलवर से काम भी शुरू हो गया है।
अभी तक एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहरों के लिए मास्टर प्लान बनाना अनिवार्य होता था, लेकिन अमृत 2.0 योजना के तहत 50 हजार से 99,999 की आबादी वाले वर्ग द्वितीय शहरों के लिए भी अब जीआइएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे। यह विकास 20 से 30 वर्षों के रोडमैप पर आधारित होगा, जिससे शहर का नियोजित विकास, रिहायशी, व्यावसायिक और बुनियादी ढांचे का नियोजन होगा। यह आधुनिक मास्टर प्लान होंगे, जो जीआइएस मैपिंग के साथ बनाए जाएंगे ताकि विकास व्यवस्थित हो सके।
बिल्डर मनचाही जगह नहीं बना सकेंगे कॉलोनी व अपार्टमेंट
बिल्डर मनचाही जगहों पर कॉलोनियां व अपार्टमेंट बना देते हैं, जिससे पूरे कंस्बे व शहर का नक्शा खराब होता है। जनता भी सस्ती जमीन के चलते इनमें निवेश कर देती है। ऐसे में मास्टर प्लान में आरक्षित जमीन के मुताबिक ही आगे का विकास हो सकेगा। यानी लैंडयूज आरक्षित होने से उस जगह पर दूसरे कार्य नहीं हो सकेंगे।

मास्टर प्लान से ये होंगे लाभ
-व्यवस्थित और नियोजित विकास से अनियंत्रित फैलाव पर रोक लगती है। यह विकास को दिशाहीन होने से रोकता है और सुनियोजित तरीके से आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों का निर्धारण करता है।
-भूमि उपयोग का सही निर्धारण होगा। इससे स्पष्ट होगा कि कौन सी जमीन किस काम (घर, पार्क, दुकान, स्कूल) के लिए इस्तेमाल होगी, जिससे लैंड यूज की अनिश्चितता खत्म होती है।
-बेहतर बुनियादी ढांचा और नागरिक सुविधाएं होंगी। भविष्य की जरूरतें सड़कें, बिजली, पानी, सीवरेज, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा सुविधाओं को जनसंख्या वृद्धि के अनुसार पहले से योजनाबद्ध किया जा सकेगा।
-यातायात में सुधार होगा। जाम को कम करने के लिए सड़कों का जाल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और पार्किंग की योजना मास्टर प्लान का हिस्सा होंगी।
-जनता के लिए रहने योग्य बेहतर वातावरण विकसित होगा। हरित क्षेत्र और पार्क बनेंगे। खुली जगहों, पार्कों और हरित पट्टियों का प्रावधान होगा, जिससे शहर में प्रदूषण कम होगा।
-सुरक्षित आवास बनेंगे। रिहायशी इलाकों में पानी की निकासी और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी।
-आर्थिक विकास होगा और निवेशकों में विश्वास बढ़ेगा। मास्टर प्लान से डेवलपर्स और निवेशकों को विश्वास मिलता है, जिससे औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
-रोजगार के अवसर मिलेंगे। नियोजित औद्योगिक और मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों से शहर में स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
-घर खरीदारों के लिए सुरक्षा होगी। घर खरीदार या जमीन खरीदने वाले यह आसानी से देख सकते हैं कि किस क्षेत्र में क्या निर्माण हो सकता है, जिससे वे अवैध निर्माण या गलत प्रॉपर्टी में निवेश करने से बचते हैं।

मास्टर प्लान में नदियों, झीलों, वन क्षेत्रों और हेरिटेज साइटों को संरक्षित करने के लिए विशेष नियम होंगे।