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गुलाब और गैंदे के फूलों से किसान हो रहे निहाल

जिले में फूलों की खेती का रकबा बढ़ागैंदा और गुलाब से हर साल कर रहे आमदनीप्रदीप यदव

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गुलाब और गैंदे के फूलों से किसान हो रहे निहाल

गुलाब और गैंदे के फूलों से किसान हो रहे निहाल

अलवर. जिले में परम्परागत खेती के साथ किसान अब फूलों की खेती को तरजीह दे रहे हैं। गैंदा, गुलदाउदी आदि फूलों की खेती कर किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। अनेक किसान तो खाद्यान्न फसलों को ना कर सिर्फ फूलों की ही खेती कर रहे हैं। इसके अलावा कोलकाता, जयपुर और दिल्ली के गुलाब के फूल और अलवर जिले के गैंदे के फूल शादी-विवा के मण्डप ही नहीं बल्कि किसानों के घरों में खुशहाली बिखेर रहे हैं। किसान परम्परागत खेती के अलावा गुलाब, गैदा व गुलदाउदी की खेती कर लागत से 10 गुना तक मुनाफा कमा रहे हैं।
जिले में परम्परागत खेती के साथ बागवानी किसानों की पहली पसंद बन रही है। फूलों की खेती में लागत कम आने और मुनाफा अच्छा कमा रहे हैं। बाजार में फूलों की मांग भी सदैव बनी रहती है। अलवर जिले में फिलहाल किसान हाइब्रिड गैंदा, कलकत्ती गैंदा, गंगानगरी गुलाब, डच रोज, हाइब्रिड गुलाब, गुलदाउदी जैसे फूलों की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा फूल विके्रता कोलकाता, जयपुर और दिल्ली से भी फूल मंगा रहे हैं।
जिले के उमैरण क्षेत्र में सबसे अधिक फूलों की खेती होती है। उमरैण में लगभग बीस बीघा में फूलों की खेती होती है। जिले में गैंदे की खेती का रकबा बढ़ा है। इसके अलावा मालाखेड़ा क्षेत्र के बीजवाड़ नरूका सहित आसपास के गांवों में गैंदे की फसल हो रही है।
फैक्ट फाइल
-एक बीघा गैंदे की खेती में करीब 20 हजार रुपए की लागत। किसान को एक से डेढ़ लाख रुपए तक की आय।
-एक बीघा गुलाब की खेती पर करीब 50 हजार रुपए खर्चा आता है और साल में एक से डेढ़ लाख रुपए तक मुनाफा।
- गैंदा की पैदावार करीब 6 महीने और गुलाब की दो से तीन साल तक पैदावार।
- जिले में गैंदे की फसल का रकबा 200 से 250 हैक्टेयर तक पहुंचा।
- गुलाब का रकबा करीब 50 हैक्टेयर तक पहुंचा।

यहां बागवानी को तरजीज
अलवर के समीपवर्ती उमरैण, मालाखेड़ा क्षेत्र में बागवानी की फसल ज्यादा होने लगी है। इनमें उमरैण, बीजवाड़ नरुका, हल्दीना, ढाईपैड़ी क्षेत्र में गैंदा, गुलाब की खेती खूब होने लगी है। इसके अलावा साहोडी, पृत्थीपुरा, माचडी, पलखड़ी, सोता का बास, लिली, भाखेड़ा, लिवारी में भी किसान बागवानी अपनाने लगे हैं।
बागवानी पर सरकार देती है सहायता
बागवानी पर किसानों को सरकार की ओर से भी सहायता मिलती है। यह मुख्यमंत्री की 10 प्राथमिकताओं में ऊपर है। फूलों की खेती में मुनाफा अधिक है और इसकी मांग भी सदैव बनी रहती है।

फूलों से अच्छा मुनाफा
वर्तमान में उमरैण में लगभग बीस बीघा में फूलों की खेती की जा रही है। हम 25-30 से साल से गैंदा, गुलाब, गुलदाउदी, सफेल फूलों की खेती कर रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। दीपावली के आसपास भी गैंदा के फूल 70 रुपए किलो तक बिके थे। फूलों की खेती में लागत कम आती है इसलिए हर साल यह खेती करते हैं। बाजरा-ग्वार बोने से इतनी आय नहीं होती है जितनी बागवानी की खेती से होती है।
-मान सिंह सैनी, किसान, उमरैण।
बाजार में कोलकाता, दिल्ली और जयपुर से भी फूल आ रहे हैं। डज रोज दिल्ली से खूब आ रहा है। बाहर के अलवर के उमरैण, मालाखेड़ा में भी गैंदा, गुलाब और गुलदाउदी की खेती की जा रही है। शादी समारोह में इन फूलों की विशेष मांग रहती है।
-गिरधारी लाल सैनी, फूल विक्रेता, पुरानी सब्जी मंडी अलवर।