
Kissa Kile Ka- Alwar Bhangarh fort History in Hindi
भानगढ़/अलवर/ जयपुर। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित अलवर जिले का आकर्षण है भानगढ़ का किला। 1573 में आमेर के राजा भगवंत दास ने भानगढ़ क़िले का निर्माण करवाया था। किला बसावट के 300 सालों बाद तक आबाद रहा। इसे माधोसिंह ने 1613 में अपना निवास बना लिया। माधो सिंह मुगल शहंशाह अकबर के नवरत्नों में से एक, भगवंत दास के छोटे बेटे व आमेर के महान मुगल सेनापति, मानसिंह के छोटे भाई थे। माधोसिंह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र छत्र सिंह इस राज्य की गद्दी पर बैठा। फिर विक्रम संवत 1722 में इसी वंश के हरिसिंह ने राजपाट संभाला, जिसके बाद इस राज्य का पतन शुरू हुआ। छत्र सिंह का एक बेटा था अजब सिं, जिसने भानगढ़ के पास ही अजबगढ़ बनवाया और वहीं रहने लगा। ये औरंगजेब का शासनकाल था। इतिहास गवाह है कि औरंगजेब कट्टर पंथी मुसलमान था। औरंगजेब के कारण हरिसिंह के दो बेटों ने इस्लाम कबूल कर लिया। दोनों मोहम्मद कुलीज और मोहम्मद दहलीज के नाम से प्रसिद्ध हुए। दोनों भाईयों के मुसलमान बन जाने और औरंगजेब की अदूरदर्शिता देख जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह ने इन्हें मारकर भानगढ़ पर कब्जा कर लिया। इसके बाद राजपाट माधो सिंह के वंशजों को दे दिया।
बहुत खूबसूरत थी भानगढ़ की राजकुमारी
इतिहास कहता है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत खूबसूरत थी। इसकी चर्चा पूरे राज्य में थी। दूर प्रदेश के राजकुमार तक उससे शादी करने की इच्छा रखते थे। उस समय रत्नावती की उम्र केवल 18 साल थी। एक दिन राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ बाजार में निकलीं। इत्र की दुकान पर वे सभी रुक गईं। जब वे इत्र की एक शीशी को लेकर उसे सूंघ रही थी, तभी वहां सिंधु सेवड़ा नाम का एक आदमी आया। वो राजकुमारी पर मोहित था। इसलिए वो उन्हें गौर से देखने लगा। कहते हैं सिंधु सेवड़ा काला जादू जानता था। राजकुमारी के रूप से आकर्षित हो कर वो उससे प्रेम करने लगा था और उसे किसी भी तरह हासिल करना चाहता था। इसलिए उसने इत्र की दुकान पर उस शीशी को काले जादू से मंत्रित कर दिया, जिसे रानी पसंद कर रही थी।
लेकिन राजकुमारी के विश्वासपात्र ने उसे सारी सच्चाई बता दी।
राजकुमारी ने फेंक दी शीशी
जब राजकुमारी को सच्चाई पता चल गई, तो उसने इत्र की शीशी पास ही एक पत्थर फेंक दी। इससे शीशी टूट गई और इत्र बिखर गया। काला जादू होने के कारण पत्थर सिंधु सेवड़ा के पीछे हो लिया और उसे कुचल डाला। सिंधु सेवड़ा तो मर गया, लेकिन मरने से पहले उस तांत्रिक ने श्राप दिया कि इस किले में रहने वाले सभी लोग जल्द ही मर जाएंगे और दुबारा जन्म नहीं लेंगे। उनकी आत्मा इस किले में ही भटकती रहेंगी।
श्राप के बाद हुआ युद्ध
तांत्रिक के मरने के बाद भानगढ़ व अजबगढ़ के बीच युद्ध हुआ और भानगढ़ किले के सारे लोग मारे गए। इसमें राजकुमारी भी शामिल थीं। लोग कहते हैं कि एक किले में इस तरह इतने लोगों के एक साथ मरने के बाद वहां चीत्कार मच गया और अब उन सबकी आत्माएं किले में घूमती हैं।
सूर्यास्त के बाद प्रवेश निषेध
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को खुदाई के बाद सबूत मिले हैं कि यह शहर एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल रहा था। अब किला भारत सरकार की देख रेख में आता है। किले के चारों तरफ आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम मौजूद रहती है। एएसआई ने सूर्यास्त बाद किसी के भी यहां रुकने को प्रतिबंधित कर रखा है। यहां तक कि सूर्यास्त के बाद प्रवेश भी वर्जित है।
Updated on:
03 Aug 2018 02:52 pm
Published on:
03 Aug 2018 01:05 pm
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