23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कृष्ण जनमाष्टमी विशेष : अलवर का अट्टा मंदिर, जिसमें स्थित है प्राचीन गुफा, यहां जानें मंदिर का इतिहास

https://www.patrika.com/alwar-news/

2 min read
Google source verification

अलवर

image

Hiren Joshi

Aug 28, 2018

krisnan Janmashtami 2018 : History Of Atta Temple Alwar

कृष्ण जनमाष्टमी विशेष : अलवर का अट्टा मंदिर, जिसमें स्थित है प्राचीन गुफा, यहां जानें मंदिर का इतिहास

अलवर. अलवर में कृष्ण भक्ति की परंपरा वर्षो पुरानी है। यहां के पूर्व राजा महाराजा और यहां की प्रजा भगवान कृष्ण की भक्ति की दीवानी र्है। इसी के चलते शहर में अलग अलग रूपों में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं विराजमान हैं। भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही राधा भी विराजमान है। कृष्ण जन्माष्टमी जैसे विशेष अवसरों पर कृष्ण मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम आयेाजित किए जाते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी आने में कुछ ही दिन शेष हैं, मंदिरों से लेकर बाजारों तक जन्माष्टमी की तैयारियां शुरु हो गई है।

शहर में मुख्य पोस्ट ऑफिस के सामने स्थित अटटा मंदिर भी ऐतिहासिक मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर काफी प्राचीन है । मंदिर में बिहारीजी महाराज की छोटे आकार की बहुत ही सुंदर प्रतिमा राधारानी के साथ विराजमान है। मंदिर का संचालन रामानंद संप्रदाय में चलने वाली गुरु परंपरा के अनुसार किया जाता है। वर्तमान में मंदिर में छठी पीढ़ी इस परपंरा को संभाल रही है।

पूर्व महाराजा जयसिंह आते थे दर्शन के लिए

पहले यहां पर मिटटी का टीला हुआ करता था जिस पर बाद में मंदिर का निर्माण किया गया । मंदिर जमीन से करीब 20 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। मंदिर अष्टकोणीय आकृति में बना हुआ है । पूर्व महाराजा जयसिंह जब मंदिर में दर्शनों के लिए जाया करते थे तो मंदिर के नीचे बने शिवालय में राजसी वस्त्र उतारकर साधारण धोती पहनकर दर्शनों के लिए जाते थे। मंदिर बहुत विशाल है। यहां की दीवारों पर जो चित्रांकन किया गया है वह भले ही पुराना हो गया हो लेकिन आज भी आकर्षक लगता है। दीवारों पर लिखे गए दोहे ईश्वर भक्ति का संदेश देते हैं।

आटा मांगकर लाते थे साधु संत

वर्षो पहले यहां पर साधु संतों व गरीबों के लिए अन्न क्षेत्र चला करता था। कोई भी व्यक्ति यहां से भूखा नहीं लौटता था। मंदिर में रहने वाले संत महात्मा ही शहर के बाजारों व मंडियों में जाकर आटा, दाल ,सब्जी आदि मांगकर लाते थे। कहा जाता है कि आटा मांगने की इसी परंपरा के चलते इस मंदिर को अटटा मंदिर का नाम दिया गया। आज भी यहां पर साधु संतों के रहने की व्यवस्था है। परिसर में ही गौशाला है जिसमें गो माता की सेवा पूजा की जाती है।

मंदिर के नीेचे है गुफा

इस मंदिर के नीचे एक लंबी और गहरी गुफा बनी हुई है। कहा जाता है कि मंदिर में रहने वाले संत महात्मा यहां पर तप व साधना करते थे। आज भी यह गुफा सुरक्षित है। यहां पर गर्मियों के दिनों में बहुत ही ठंडक रहती है। श्रद्धालु इस तपभूमि के भी दर्शन करते हैं।

15 दिन तक चलता है हिंडोला उत्सव

मंदिर के वर्तमान महंत रामदास ने बताया कि जन्माष्टमी पर यहां पर बड़ी संख्या में भक्त भगवान के दर्शनों के लिए आते हैं। इसके साथ ही धुलंडी को भगवान भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इस दिन यहां पर बड़ा मेला लगता है। सावन मास में यहां पर 15 दिन तक हिंडोला उत्सव आयोजित किया जाता है। इसका समापन कृष्ण पक्ष की दौज को होता है। इस दिन खास तौर से भगवान को हलुआ का भोग लगाया जाता है।