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मौजूदा राज्य सरकार का अंतिम साल, अलवर पुलिस पर उठने लगे सवाल, जानिए इस पर क्या कहतें है अलवर के लोग

राजस्थान सरकार का यह अंतिम साल है, और अब अलवर पुलिस के कार्य पर सवाल उठ रहे हैं, इस पर अलवर के लोगों ने अपनी राय दी है।

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अलवर

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Prem Pathak

Feb 28, 2018

last year of present government but MLA questioning on alwar police

अलवर. जिला दशकों से अपराध के लिए बदनाम रहा है, लेकिन सरकार के अन्तिम साल में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जनता के मन में भी सवाल-जवाब उमड़ रहे हैं। पत्रिका ने मंगलवार को जिले के कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों सहित आमजन से जाना कि क्या वास्तव में पुलिस अपना काम बेहतर तरीके से नहीं कर रही है? अथवा इसकी कोई और वजह है। जिले के लिए और ऐसा क्या होना चाहिए, जिससे अपराधों पर और प्रभावी अंकुश लग सके। पेश है पत्रिका की रिपोर्ट-

एनसीआर में पहले भी अपराध होते थे, लेकिन पिछले साल-डेढ़ साल में अलवर पुलिस ने काफी बेहतर कार्य किया है। चाहे लूट हो या डकैती। हत्या, दुष्कर्म जैसे मामलों के खुलासे में भी पुलिस को लगभग शत प्रतिशत सफलता मिली है। अलवर का सीमावर्ती जिला होने के कारण अलवर में गोतस्करी को रोकना भी पुलिस के लिए चेलैन्ज है। फिर भी इसमें बेहतर कार्य कर रही है। इतनी कम फोर्स के होते अलवर पुलिस की यह उपलब्धि किसी जज्बे से कम नहीं है।
सुरेश यादव, सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक अलवर।

पुलिस की कार्यप्रणाली में अब काफी बदलाव आया है। पुलिस अपराधों की रोकथाम के लिए काफी सजग हुई है। आपराधिक मामलों के भी रोज खुलासे हो रहे हैं। यह शुभ संकेत हैं। सरकार को भी अलवर जिले पर ध्यान देना चाहिए और पुलिस की नफरी बढ़ानी चाहिए।
खेमचंद, हवलदार, नौगावां

जले में अपराधों में कमी आई है। लूट, हत्या, डकैती जैसी संगीन वारदातों पर अंकुश लगा है। एेसे मामलों में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अपराधियों को दबोचा है। यदि जिले में पुलिस की नफरी कुछ और बढ़ा दी जाए, तो और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
मानसिंह यादव, भूतपूर्व पंचायत समिति सदस्य।

जिले में अपराधों की रोकथाम के लिए पिछले साल-डेढ़ साल में अलवर पुलिस ने कई नए प्रयोग किए। इससे अपराधों में कमी आई। अपराधियों में भी भय कायम हुआ। इस दौरान पुलिस ने गश्त व्यवस्था को बढ़ाया। सिग्मा, चेतक, निर्भया स्क्वाइड आदि से आमजन को राहत मिली।
नरेन्द्र कुमार, सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर अलवर।