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Leh Ladakh: लेह में देह और करगिल में दिल, मानों लद्दाख को मिली मंजिल

Leh Ladakh And Kargil News: देश की आजादी के समय कुशोक बकुला रिनपोछे के नेतृत्व में देखा गया ( Jammu-Kashmir) जम्मू-कश्मीर से अलग केंद्र शासित प्रदेश होने का (Ladakh) लद्दाख वासियों का सपना पूरा हो चुका है। अगस्त 2019 से नए ( Ladakh) लद्दाख नें अंगड़ाई ली है। भारत के मुकुट का मोती लद्दाख देश का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है। जबकि देश में सबसे कम जनसंख्या घनत्व भी यहीं है।

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अलवर

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Hiren Joshi

Sep 23, 2021

Leh Ladakh And Kargil Ground Report Latest News

Leh Ladakh: लेह में देह और करगिल में दिल, मानों लद्दाख को मिली मंजिल

लद्दाख. Leh Ladakh Ground Report In Hindi: किसी भू-भाग के लोगों का सात दशक का सपना पूरा होना कैसा होता होगा? यह हमें लद्दाख में जाकर महसूस होता है। लद्दाखवासियों के बीच जाकर लगा कि वहां हर घर में उत्सव मनाया जा रहा है। लोग उत्साहित हैं और भारत सरकार के प्रति कृतज्ञ हैं।

देश की आजादी के समय कुशोक बकुला रिनपोछे के नेतृत्व में देखा गया जम्मू-कश्मीर से अलग केंद्र शासित प्रदेश होने का लद्दाख वासियों का सपना पूरा हो चुका है। अगस्त 2019 से नए लद्दाख नें अंगड़ाई ली है। भारत के मुकुट का मोती लद्दाख देश का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है। जबकि देश में सबसे कम जनसंख्या घनत्व भी यहीं है। प्रकृति यहां अलग रूप में है। बर्फ के साथ रेगिस्तान। दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र सियाचिन इसी लद्दाख में है। पुण्य सलिला सिंधु, जिससे भारतवर्ष का एक नाम हिंदुस्तान हुआ वह भी लद्दाख की मनोरम घाटियों में बहती हुई पाकिस्तान होते हुए सिंधु सागर में गिरती है। जिसे अब अरब सागर कहा जाता है।

स्वायत पर्वत परिषद का मान

लद्दाख के कश्मीर में उपेक्षित होने के दर्द से उभरे आंदोलनों के कारण 90 के दशक में यहां लद्दाख स्वायत पर्वत परिषद का गठन हुआ। बाद में स्वायत पर्वत परिषद लेह और कारगिल के रूप में सामने आई। जैसे शेष भारत में जिला परिषदों का काम है वैसे ही यहां स्वायत परिषद है। यद्यपि यह परिषद अपेक्षाकृत सजग है। 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट में भी दोनों स्वायत पर्वत परिषदों का मान रखा गया है। चुनी हुई परिषद के पास पहले के तमाम अधिकारों के साथ नया उत्साह भी जुड़ा है। लद्दाख के पहले उप-राज्यपाल राधाकृष्ण माथुर का कहना है कि जो चुनौतियां और मुद्दे सामने आ रहे हैं उन्हें सकारात्मक रूप से हल किया जा रहा है। जिसमें दोनों पर्वत परिषद का योगदान है। लद्दाख स्वायत पर्वत विकास परिषद लेह के चेयरमैन एडवोकेट ताल्सी और कारगिल के चेयरमैन फिरोज अहमद खान से बात की तो दोनों ने एक स्वर से कहा कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख विकास के नए मापदंड बनाएगा। ऐसा लगता है कि लद्दाख का देह लेह में है तो दिल कारगिल में है।

उपेक्षित लद्दाख अब विकास की उम्मीदों से लबरेज

जम्मू-कश्मीर राज्य के अंतर्गत् रहे लदख के लोगों की सबसे बड़ी शिकायत थी विकास में उपेक्षा। स्वायत पर्वत परिषद के सबसे युवा अध्यक्ष रह चुके लद्दाख के मौजूदा सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल का कहना है कि सात दशक में जो कसक रही है वह अब पूरी होगी। पूरे राज्य का 60 प्रतिशत क्षेत्रफल होने के बावजूद बजट में हिस्सा 10 प्रतिशत से भी कम रहता था। संसद के पारित जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 से लद्दाख देश का नवां केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दशकों से लोगों की टीस यही थी कि कश्मीर की सियासत में लद्दाख को योजनाबद्ध रूप से उपेक्षित किया गया। जिसका नतीजा यही रहा कि यहां विकास के नाम पर सेना के इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा कुछ भी नहीं हो पाया। स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य प्रबंधों के नाम पर लद्दाख में मामूली काम ही हुए।

]घाटी के विवादों के बीच लद्दाख की आवाज सदा से नक्कारखाने में तूती की तरह ही रही। अब अलग पहचान से क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें परवान पर हैं। अलग मेडिकल कॉलेज, सेंट,ल यूनिवर्सिटी, खेल की सुविधाओं का आगाज हुआ है। इसके साथ वैश्विक बाजार में यहां के हस्त उत्पादों की पहुंच का रास्ता खुल गया है। शांतिपूर्ण लद्दाख का भारत की पर्यटन राजधानी होना तय है। यूरोप के तमाम पर्यटन स्थलों से भी सुंदर नजारे लद्दाख में मौजूद हैं। कश्मीर से अलग होते ही यह तस्वीर सबके सामने आना बाकी है।


भारत के संकल्प का साक्षी लद्दाख
166698 वर्ग किलोमीटर में फैले लद्दाख का 59146 वर्ग किमी क्षेत्र पर हमारा नियंत्रण है जबकि शेष पर चीन, पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। भारत के उस संकल्प का प्रतीक भी लद्दाख है। जिसमें पाकिस्तान और चीन की हथियाई भूमि को वापस लेना है। भारत पर हुए पहले हमले का सामना लद्दाख ने किया था। यहां के लोगों ने भारत की सेना को सहयोग किया और कबायलियों को खदेड़ा गया। कारगिल युद्ध में भी पाकिस्तान की सेना को मुंह की खानी पड़ी। आज भी लद्दाख के लोगों को चीन पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाली जमीन वापस लेने का विश्वास है। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध मोर्चों पर स्थानीय नागरिकों का यह शौर्य संकल्प महत्वपूर्ण है।


लोकसभा अध्यक्ष की पहल
लद्दाख में लोकतंत्र की जड़ों को पल्लवित करने का एक अनूठा प्रयास अभी देखा गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने चार दिन तक लद्दाख में रहकर पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर ग्रामीणों से संवाद किया। सर्वोच्च पंचायत के अध्यक्ष ने अंतिम व्यक्ति से सीधा संवाद किया। दुर्गम क्षेत्र पैंगोंग के ग्रामीणों के बीच जाकर लोकसभा अध्यक्ष ने उनके गांवों की व्यवस्थाओं के बारे में बात की। लेह और कारगिल के
पंच, सरपंच, बीडीसी प्रतिनिधियों से दिनभर संवाद किया। संवाद का सार यह रहा कि लद्दाख बदल रहा है और भारत के विकास में बढ़कर योगदान देने को संकल्पित है।

कुशुक बकुला रिनपोछे लद्दाख के करिश्माई नेता और आध्यात्मिक हस्ती थे। उनहोने ल्हासा में उच्च शिक्षा प्राप्त की। भारत पर पाकिस्तानी कबाइलियों के हमले के समय इनके नेतृत्व में आमजन उठ खड़ा हुआ था। लद्दाख से दो-दो बार सांसद और विधायक बने। पदम् पुरुस्कार प्राप्त बकुला मंगोलिया में भारत के राजदूत भी रहे। लदाख के बुद्बीजीवियों में आम चर्चा है कि 50 के दशक में भारत सरकार की योजना से वो चीन गए थे। तब हिंदी चीनी भाई भाई के राजकीय माहौल में उन्होंने वापस आकर चेताया था कि चीन जल्दी ही भारत और तिब्बत पर हमला करेगा। बाद में ऐसा ही हुआ । जम्मू-कश्मीर राज्य में लद्दाख के हितों के लिए सदा मुखर रहे बकुला के प्रति लद्दाख का हर व्यक्ति श्रद्धावान है।