अलवर. शहर को हिला देने वाली एक ही परिवार के पांच जनों की गला काटकर हत्या की सनसनीखेज घटना पर मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश संख्या-2 रेणु श्रीवास्तव ने प्रकरण में अभियुक्त संतोष उर्फ संध्या शर्मा और उसके प्रेमी हनुमान उर्फ जैक को आजीवन कारावास की सजा की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। इस बहुचर्चित प्रकरण में न्यायालय का फैसला जानने के लिए कोर्ट परिसर में काफी भीड़ लगी रही।
प्रकरण स्पेशल पीपी एडवोकेट अशोक शर्मा ने बताया कि शिवाजी पार्क निवासी संतोष उर्फ संध्या शर्मा ने अपने प्रेमी हनुमान उर्फ जैक के साथ मिलकर प्रेम-प्रसंग में रोड़ा बन रहे अपने पति बनवारी लाल शर्मा और बड़े बेटे मोहित की हत्या की साजिश रची। 2 अक्टूबर 2017 की रात संतोष उर्फ संध्या शर्मा ने प्रेमी हनुमान उर्फ जैक और भाड़े के हत्यारे कपिल व दीपक के साथ मिलकर एक ही कमरे सो रहे अपने पति बनवारीलाल शर्मा (45), पुत्र मोहित (17), हैप्पी (15) व अज्जू (12) और भतीजे निक्की (10) की छुरे से लगा रेतकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए हत्या के मुल्जिम संतोष उर्फ संध्या शर्मा पत्नी बनवारीलाल शर्मा निवासी गारु-कठूमर हाल किरायेदार शिवाजी पार्क-अलवर, हनुमान प्रसाद उर्फ जैक पुत्र प्रेमङ्क्षसह जाट निवासी होली चौक भटपुरा रोड बड़ौदामेव-अलवर, कपिल धोबी पुत्र बनवारीलाल धोबी निवासी गुजुकी-मालाखेड़ा और दीपक उर्फ बुगला पुत्र मांगेलाल धोबी निवासी धोबी मोर थाना डीग-भरतपुर हाल सुदामागढ़ी सुरीर-मथुरा को गिरफ्तार किया। पुलिस ने सभी मुल्जिमों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया था।
अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश संख्या-2 रेणु श्रीवास्तव ने प्रकरण में सुनवाई पूरी करते हुए सोमवार को संतोष उर्फ संध्या और उसके प्रेमी हनुमान को हत्या का दोषी मान लिया था। न्यायालय ने मंगलवार को संतोष उर्फ संध्या और उसके प्रेमी हनुमान को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपए जुर्माना सजा सुनाई। इसके बाद दोनों अभियुक्तों को जेल भेज दिया गया।
दंडादेश को चुनौती देंगे
प्रकरण के स्पेशल पीपी एडवोकेट अशोक शर्मा का कहना है कि न्यायालय ने प्रकरण को रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं मानते हुए फैसला सुनाया है। संतोष और हनुमान को दोषी मानना न्यायालय का निर्णय सही है, लेकिन दंडादेश को चुनौती दी जाएगी। अभियुक्तों को इस गंभीर अपराध की उचित सजा दिलाने के लिए सरकार के माध्यम से उच्च न्यायालय में अपील की जाएगी। उधर, प्रकरण के जांच अधिकारी पुलिस निरीक्षक विनोद सामरिया का कहना है कि इस ब्लाइंड मर्डर में काफी मेहनत से काम किया और इसका खुलासा किया था। जैसा हत्याकांड था उसके अनुसार फैसला नहीं है। आरोपियों को सजा-ए-मौत होनी थी। अधिकारियों से मिलकर ऊपर अपील करेंगे।
जाग होने पर पति व बड़े पुत्र सहित सभी को मार दिया
अभियुक्त संतोष उर्फ संध्या का पति बनवारीलाल शर्मा फैक्ट्री में ऑपरेटर की नौकरी करता था। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने पर संतोष ने ताइक्वांडो सिखाने लगी। इसी दौरान उसकी मुलाकात हनुमान उर्फ जैक से हुई। दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग शुरू हो गया। संतोष ताइक्वांडो के लिए कई-कई दिन तक घर से बाहर रहती थी। संतोष और हनुमान के सम्बन्धों को लेकर पति बनवारीलाल शर्मा और बड़ा बेटा मोहित शक करते थे और संतोष को रोकते-टोकते थे। प्रेम संबंधों में रोड़ा बन रहे पति और बड़े बेटे को रास्ते से हटाने के लिए संतोष ने हनुमान के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। इसके लिए हनुमान ने सुपारी देकर दीपक और कपिल को हत्या के लिए तैयार किया। प्लाङ्क्षनग के अनुसार संतोष ने 2 अक्टूबर की रात परिवार के सभी सदस्यों को रायते में नींद की गोलियां पीस कर खिला दी। इसके बाद हनुमान, कपिल और दीपक रात एक बजे संतोष के घर पहुंचे। संतोष के इशारा कर बताने पर हनुमान और उसके साथियों ने पति बनवारीलाल की छुरे से गला रेतकर हत्या कर दी। हलचल सुनकर जागे बड़े बेटे मोहित का गला रेत दिया। जाते समय हनुमान को पैर पडऩे से कमरे में सो रहे हैप्पी व अज्जू और भतीजा निक्की हिलने-ढुलने लगे। जिस पर हनुमान और उसके साथियों ने गला रेतकर इन तीनों की भी हत्या कर दी।
हत्यारों के चेहरे पर नहीं थी शिकन
हत्याकांड में फैसला सुनाने के लिए पुलिस अभियुक्त संतोष उर्फ संध्या और उसके प्रेमी हनुमान उर्फ जैक को जेल से लेकर मंगलवार सुबह करीब पौने बजे कोर्ट पहुंची। दोनों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद पुलिस दोनों अभियुक्तों को गाड़ी में बैठाकर रवाना हो गई। इस दौरान संतोष ने चेहरे पर कपड़ा बांधा हुआ था और हनुमान ने मास्क लगाया हुआ था। मीडियाकर्मियों के सवालों को दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। फैसले के बाद दोनों के चेहरों पर कोई शिकन नजर नहीं आई।
दो मुल्जिमों की सुनवाई पर हाईकोर्ट से स्टे
हत्याकांड में शामिल मुल्जिम कपिल धोबी और दीपक उर्फ बुगला को पुलिस ने बालिग मानते हुए न्यायालय में चालान पेश किया था, लेकिन बाद में एडीजे संख्या-2 कोर्ट ने दोनों नाबालिग मान लिया। मुल्जिम कपिल का प्रकरण डीजे कोर्ट तथा दीपक का प्रकरण जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों मुल्जिमों को नाबालिग मानने के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील की गई। जिस पर हाईकोर्ट ने दोनों मुल्जिमों की सुनवाई पर स्टे दिया हुआ है।
80 पन्नों का फैसला सुनाया
प्रकरण में न्यायालय ने 80 पन्नों का फैसला सुनाया है। करीब साढ़े पांच साल पुराने इस प्रकरण में न्यायालय के समक्ष 77 गवाह कराए गए। इसके अलावा 369 दस्तावेज और 70 आर्टिकल पेश किए गए। न्यायालय ने 211 तारीख पेशियों के बाद प्रकरण में फैसला सुनाया है।
फांसी की मांग
कठूमर. करीब साढ़े 5 साल पहले 4 बच्चों व पति की हत्या के मामले में कठूमर की गारू निवासी अभियुक्त संतोष उर्फ संध्या एवं उसके प्रेमी बड़ौदामेव निवासी हनुमान प्रसाद उर्फ जैक को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को परिजनों ने कम बताया है। उसके पैतृक गांव गारू में जब पत्रिका संवाददाता पहुंचे तो परिजन टीवी पर टकटकी लगाकर फैसले को सुन रहे थे। उनसे सजा के बारे में पूछा तो सभी ने उत्तर दिया कि इस जघन्य कांड की विभित्सा को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा कम है।