
देशी रियासतों के दौर में भी अलवर में लोकतंत्र की हवा शुरू हो चुकी थी। प्रजामंडल आंदोलन की भट्टी में पककर तैयार हुए जिन नेताओं ने राजस्थान निर्माण की दिशा में सबसे पहले मत्स्य संघ का गठन करवाया था, उन्हीं से यहां का संसदीय इतिहास शुरू होता है। आजादी से पहले गठित अलवर प्रजामंडल के नेता बाबू शोभाराम मत्स्य संघ के पहले प्रधानमंत्री बने थे।
निर्दलीय और बाहरी को भी सिर आंखों पर रखा
बाबू शोभाराम ने 1952 के पहले और 1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अलवर से जीत दर्ज की थी। एक दौर ऐसा भी आया जब अलवर के मिजाज को दलों का गणित रास नहीं आया। तब 1962 के लोकसभा चुनाव में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लाला काशीराम संसद में पहुंचे। इसके बाद देश में आपातकाल के समय में अलवर की जनता का मूड बदल गया और बाद में हुए चुनाव में जनता पार्टी विजयी रही। 80 के दशक में देशभर में चरम पर रही मंडल राजनीति से भी अलवर अनछुआ नहीं रहा। यहां तक 1989 के चुनाव में जनतादल जीत गया।
इसके बाद राममंदिर आंदोलन के दौर में बीजेपी ने पहली बार इस सीट पर जीत का स्वाद चखा। तब से अब तक यहां कांग्रेस और बीजेपी प्रमुख दावेदार रहे हैं। 2014 के चुनाव में देश भर में चल रही मोदी लहर के बीच यहां से हरियाणा से आए महंत चांदनाथ ने केंद्रीय मंत्री रहे जितेंद्र सिंह को 2.83 लाख वोटों से शिकस्त दी। बाहरी उम्मीदवार भी अलवर में अपना रंग जमाने में कामयाब रहे हैं। दिग्गज कांग्रेसी नेता नवलकिशोर शर्मा ने भी यहां से संसद का रास्ता प्रशस्त किया था।
अलवर लोकसभा क्षेत्र से ये रहे सांसद
कार्यकाल सांसद राजनीतिक दल
1952-57 शोभाराम आईएनसी
1957-62 शोभाराम आईएनसी
1962-67 काशीराम गुप्ता निर्दलीय
1967-71 भोलानाथ मास्टर आईएनसी
1971-77 एचपी शर्मा आईएनसी
1977-80 रामजीलाल यादव जनता पार्टी
1980-84 रामसिंह यादव आईएनसी
1984-89 रामसिंह यादव आईएनसी
1989-91 रामजीलाल यादव जनता दल
1991-96 महेन्द्र कुमारी भाजपा
1996-98 नवल किशोर शर्मा आईएनसी
1998-99 घासीराम यादव आईएनसी
1999-2004 जसवंत सिंह यादव भाजपा
2004-09 करणसिंह यादव आईएनसी
2009-14 जितेन्द्र सिंह आईएनसी
2014-17 महंत चांदनाथ भाजपा
Published on:
13 Jan 2018 11:41 am
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