
ढोल की थाप पर थिरक कर मनाई लोहड़ी
अलवर. ढोल की थाप पर नाचते गाते लोगों ने सोमवार शाम को लोहड़ी पर्व मनाया। नव दम्पत्ति और नव संतान वाले घरों में भी लोहड़ी पर्व मनाया गया। जिले में कई भागों में लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व उन परिवारों के लिए विशेष था जिनके घरों में एक साल के भीतर शादी या संतान हुई है। कई परिवारों ने तो इस मौके को शादी की तरह उत्सव मनाया। शाम को भंगड़े की मस्ती के साथ आग सेंकते हुए इस पर्व की खुशियां मनाई गई।
इस अवसर पर मूंगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न और मूंगफली प्रसाद के रूप में वितरित की गई। इससे पहले लोगों ने आग में रेवड़ी व मूंगफली डाली और अग्नि देवता से सभी की सुख व समृद्धि की कामना की।
खुशी का प्रतीक है लोहड़ी
लाजपत नगर गुरुद्वारा के प्रधान हरमीत सिंह मेहंदीरत्ता का कहना है कि यह पर्व खुशी का प्रतीक है। यह पर्व किसानों का प्रमुख त्योहार है। इस दिन नए अन्न को अग्नि देवता को प्रसन्न करने के लिए लोहड़ी में जलाते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं। जलती लोहड़ी में गजक और रेवड़ी को अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। लोहड़ी में भी होलिका दहन की तरह ही उपलों और लकडय़िों का छोटा ढेर बनाया जाता है। इसके आस -पास परिवार और रिश्तेदार खड़े होते हैं और नाच गाकर खुशियां मनाते हैं। महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर लोहड़ी की आग को तपाती हैं। माना जाता है इससे बच्चा स्वस्थ रहता है और उसे बुरी नजर नहीं लगती।
लोहड़ी का है अध्यात्मिक महत्व
हिन्दू पौराणिक शास्त्रों में अग्नि को देवताओं का मुख माना गया है। किसान मानते हैं कि अग्नि में समर्पित किया गया अन्न का भाग देवताओं तक पहुंचता है। ऐसा करके लोग सूर्य देव व अग्निदेव के प्रति कृतज्ञता जताते हैं।
Published on:
14 Jan 2020 02:31 am
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