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जानिए चुनावों में कैसे चिन्हित होते हैं संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथ, इस आधार पर लगाई जाती है फोर्स

आपने अक्सर चुनावों से पहले संवेदनशील अैर अति संवेदनशील बूथ के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका वर्गीकरण कैसे होता है?

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अलवर

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Hiren Joshi

Apr 16, 2019

Lok Sabha Election 2019 Categorisation Of Sensitive Booths In Election

जानिए चुनावों में कैसे चिन्हित होते हैं संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथ, इस आधार पर लगाई जाती है फोर्स

अलवर. लोकसभा चुनाव में इस बार चुनाव आयोग अति संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर तीसरी आंख तैनात करेगा। ये तीसरी आंख सीसीटीवी कैमरे होंगे जिनकी रिकार्डिंग का लाइव प्रसारण वेबकास्टिंग की मदद से होगा। क्रिटिकल मतदान केन्द्रों पर (आप सीसीटीवी कैमरे की नजर में हैं) लिखे बैनर भी लगाए जाएंगे। अति संवेदनशील मतदान केन्द्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी। जिले में करीब 100 से 125 तक अति संवेदनशील मतदान केन्द्र चिह्नित किए गए हैं।

लोकसभा चुनाव में शांतिपूर्ण मतदान के लिए जिला प्रशासन ने ऐसे मतदान केन्द्र चिन्हित कर लिए हैं जहां पूर्व में उपद्रव, ईवीएम या मतपेटी उठा ले जाने की वजह से पुनर्मतदान कराया गया। मतदान के दौरान मतदाताओं को भयमुक्त रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध के साथ ही मतदान की प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।

ऐसे चिन्हित होते हैं बूथ

चुनाव के दौरान भयग्रस्त, संवेदनशील व अति संवेदनशील मतदान केन्द्रों का चिह्निकरण चार प्रकार से होता है। इनमें वे मतदान केन्द्र जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जुड़वाए गए हों, वे मतदान केन्द्र जहां बड़ी संख्या में नाम तो जुडवाए गए, लेकिन उन्हें मतदाता फोटो पहचान से लिंक नहीं कराया हो, ऐसे मतदान केन्द्र जहां पूर्व में हुए चुनाव में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़े हो या फिर किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में 75 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ हो।
इसके अलावा वे मतदान केन्द्र जहां पूर्व में मतदान के दौरान उपद्रव, पोलिंग स्टेशन से मतपेटी या ईवीएम उठा ले जाने, झगड़ा या अन्य कारणों से पुनर्मतदान हुआ हो। लोकसभा चुनाव में अलवर जिले में ऐसे मतदान केन्द्रों की संख्या 100 से 125 के आसपास रहने की संभावना है।

क्रिटिकल केन्द्रों से तय होती है फोर्स की मांग

जिले में भयग्रस्त, अति संवेदनशील व संवेदनशील मतदान केन्द्रोंं के आधार पर ही चुनाव के दौरान पुलिस व अद्र्धसैनिक बलों की मांग तय होती है। इन मतदान केन्द्रों का चिन्हीकरण होने के बाद ही वहां लाइव टेलीकास्ट का निर्णय किया जाता है।

जयपुर से मिली मंजूरी

लोकसभा चुनाव में इस बार जिले में ज्यादा से ज्यादा मतदान केन्द्रों पर वेब कास्टिंग (लाइव टेलीकास्ट) के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी जिले में अधिकतम मतदान केन्द्रों पर वेब कास्टिंग के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है। प्रशासन का प्रयास है कि मतदान के दौरान अवांछनीय हरकत करने वालों में प्रशासन का भय रहे ताकि चुनाव शांतिपूर्ण हो सके।
इंद्रजीत सिंह , जिला निर्वाचन अधिकारी अलवर।