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अलवर में गहराया रसोई गैस संकट: स्टॉक से 14 हजार ज्यादा बुकिंग, एजेंसियों पर उमड़ रही भारी भीड़

राजस्थान के अलवर जिले में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है।

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राजस्थान के अलवर जिले में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम जनता की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिया है। एक तरफ प्रशासन दावा कर रहा है कि जिले में गैस का कोई संकट नहीं है, वहीं दूसरी ओर रसद विभाग के आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर इतना बढ़ गया है कि हजारों लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

आंकड़ों में हकीकत: स्टॉक कम, मांग ज्यादा

रसद विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में पूरे जिले की गैस एजेंसियों के पास कुल 20,039 सिलेंडरों का स्टॉक उपलब्ध है। इसके विपरीत, बुकिंग कराने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 34,500 तक पहुंच गई है। यानी करीब 14,500 से ज्यादा उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने सिलेंडर बुक तो कर लिया है, लेकिन उन्हें डिलीवरी नहीं मिल पा रही है।

एजेंसियों पर लंबी कतारें, उपभोक्ता परेशान

NEB स्थित प्रसन्न गैस एजेंसी यहाँ पहुंचे उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि उनकी बुकिंग को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन सिलेंडर घर नहीं पहुंचाए गए। थक-हारकर लोग खुद ही खाली सिलेंडर लेकर एजेंसी पहुंच रहे हैं। मालवीय नगर और अलकापुरी इन क्षेत्रों में भी हालात जुदा नहीं हैं।


अलकापुरी की गैस एजेंसी पर तो उपभोक्ताओं ने बुकिंग न होने और देरी को लेकर जमकर विरोध दर्ज कराया। मित्तल अस्पताल के पास यहाँ भी एक एजेंसी के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। लोग काम-धंधा छोड़कर गैस के लिए लाइन में लगने को मजबूर हैं।

पैनिक बुकिंग ने बढ़ाई मुश्किल

सप्लाई में देरी के कारण लोगों में डर बैठ गया है, जिससे 'पैनिक बुकिंग' बढ़ गई है। रसद विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लोग घरों में रखे अतिरिक्त खाली सिलेंडरों को भी अभी से भरवा कर रख लेना चाहते हैं, जिससे डिमांड अचानक बढ़ गई है।

कमर्शियल सप्लाई से मिली थोड़ी राहत

जहाँ घरेलू उपभोक्ता परेशान हैं, वहीं होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए राहत की खबर है। जिले में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई सुचारू रूप से शुरू कर दी गई है, जिससे बाजार में खाने-पीने की दुकानों का कामकाज पटरी पर लौटने लगा है। निष्कर्ष प्रशासन भले ही स्थिति सामान्य होने का दावा करे, लेकिन जब तक स्टॉक और बुकिंग के बीच का यह 14 हजार का अंतर कम नहीं होता, तब तक अलवर के निवासियों को गैस के लिए कतारों में खड़ा होना ही पड़ेगा।