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पानी के इंतजाम खुद कर लें…रह सकते हैं प्यासे

एक साल पहले नगर निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ कि हर वार्ड में दो सिंगल फेस बोरिंग बनाई जाएंगी। ये प्रस्ताव केवल कागजों तक ही सीमित है। पार्षदों का कहना है कि 130 सिंगल फेस बोरिंग शहर में बन जाती तो करीब 2 लाख लोगों का गला तर होता लेकिन अब तक उनसे प्रस्ताव तक नहीं मांगे गए। सरकारी मशीनरी खुद चाहती है कि संकट बढ़े। जनता परेशान हो। आयुक्त मनीष कुमार का कहना है कि इस प्रस्ताव पर काम चल रहा है।

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अलवर

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susheel kumar

Feb 27, 2024

पानी के इंतजाम खुद कर लें...रह सकते हैं प्यासे

पानी के इंतजाम खुद कर लें...रह सकते हैं प्यासे

130 बोरिंग हो जाती तो 2 लाख आबादी का गला होता तर...एक साल से सो रहा नगर निगम
- गर्मी शुरू होते ही फिर शहर में पानी को लेकर मचेगा हाहाकार...टैंकरों पर निर्भर रहेंगे शहरी
- निगम बोर्ड की बैठक में एक साल पहले पास हुआ था बोरिंग का प्रस्ताव, इसे आगे नहीं बढ़ाया

एक साल पहले नगर निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ कि हर वार्ड में दो सिंगल फेस बोरिंग बनाई जाएंगी। ये प्रस्ताव केवल कागजों तक ही सीमित है। पार्षदों का कहना है कि 130 सिंगल फेस बोरिंग शहर में बन जाती तो करीब 2 लाख लोगों का गला तर होता लेकिन अब तक उनसे प्रस्ताव तक नहीं मांगे गए। सरकारी मशीनरी खुद चाहती है कि संकट बढ़े। जनता परेशान हो। आयुक्त मनीष कुमार का कहना है कि इस प्रस्ताव पर काम चल रहा है।

इस तरह आया था पानी का प्रस्ताव
पिछले साल मार्च में बोर्ड की बैठक के दौरान पानी संकट को लेकर हंगामा हुआ। पार्षदों ने प्रस्ताव रखा कि सिंगल फेस बोरिंग हर वार्ड में दो-दो बनाई जाएं। एक बोरिंग पर करीब 4 लाख का खर्च आएगा। ऐसे में 8 लाख रुपए बोरिंग पर खर्च की मंजूरी दी जाए। तय हुआ कि बोरिंग जहां-जहां बनाई जानी हैं, उसके लिए नगर निगम पार्षदों से प्रस्ताव लेगा। प्रस्ताव पास हो गया। 6 माह बीते। फिर ये प्रस्ताव पार्षदों ने दूसरी बैठक में उठाया। फिर वही प्रस्ताव की बात सामने आई। कुल मिलाकर तीन बैठकें हो चुकी हैं लेकिन बोरिंग के प्रस्ताव पार्षदों से नहीं जुटाए गए।

पार्षद बोले- बोर्ड बैठक मजाक बनकर रह गई
पार्षद सतीश यादव का कहना है कि गर्मी आ रही है। पानी का संकट फिर होगा। नगर निगम इस प्रस्ताव पर पिछले साल काम करता तो इस बार जनता को पानी मिल जाता। पार्षद विक्रम यादव का कहना है कि बोर्ड बैठक मजाक बनकर रह गई है। वहां जो भी प्रस्ताव पास होते हैं वह धरातल पर नहीं आते। पार्षद नारायण साईंवाल का कहना है कि निगम जनता के हित में काम नहीं करना चाहता।