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अलवर में फर्जी नियु​क्तियाें में कई फंसे

अलवर. जिला परिषद की ओर से शिक्षकों व लिपिकों की हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है। इसका खुलासा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) जयपुर की जांच में हुआ है। उनकी जांच रिपोर्ट यहां पहुंची तो चार लोगों के खिलाफ धारा 420 व 120 बी में अरावली विहार थाने में केस दर्ज कर लिया गया। इसकी विस्तृत जांच होगी।

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अलवर

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susheel kumar

Aug 06, 2023

अलवर में फर्जी नियु​क्तियाें में कई फंसे

अलवर में फर्जी नियु​क्तियाें में कई फंसे


जिला परिषद : फर्जी नियुक्तियों पर एसओजी की बड़ी कार्रवाई, चार पर रिपोर्ट


- एसओजी जयपुर के पुलिस निरीक्षक की जांच में हुआ खुलासा, उनकी जांच रिपोर्ट पर ही दर्ज हुए केस

- इस मामले में नियुक्ति अधिकारी, भर्ती शाखा लिपिक, दस्तावेज सत्यापन दल के कई लोग लपेटे में
अलवर. जिला परिषद की ओर से शिक्षकों व लिपिकों की हुई भर्तियों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है। इसका खुलासा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) जयपुर की जांच में हुआ है। उनकी जांच रिपोर्ट यहां पहुंची तो चार लोगों के खिलाफ धारा 420 व 120 बी में अरावली विहार थाने में केस दर्ज कर लिया गया। इसकी विस्तृत जांच होगी। एसओजी के मुताबिक इस जांच में जिला परिषद का पूरा नियुक्ति दल फंस रहा है। केस दर्ज होने के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि परिषद में एसओजी की पहली बार एंट्री हुई थी और पहली बार मामला भी दर्ज हुआ।


एसओजी जयपुर निरीक्षक सुरेश कुमार ने आरोपों के आधार पर परिषद के अफसरों से कुछ रेकॉर्ड लिए थे और उनके भी बयान दर्ज किए। उसके बाद उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी। उसी के आधार पर केस दर्ज हुआ है। अरावली विहार थाने में शिक्षक रुकमणी नंदन शर्मा, लिपिक कमल सिंह व दो अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बाकी विस्तृत जांच के आधार पर केस दर्ज होंगे। राजस्थान पत्रिका ने छह लोगों की नियुक्तियों को लेकर दो मई को खबर प्रकाशित की। परिषद के जिम्मेदार इस खबर को झुठलाते रहे। उलटा मीडिया की भूमिका पर ही जांच कराने का निर्णय ले लिया लेकिन एसओजी ने इन मामलों को गंभीरता से लिया और फर्जी नियुक्तियां पाई गईं।

क्या कहती है एसओजी की रिपोर्ट

एसओजी के निरीक्षक सुरेश कुमार का कहना है कि जिला परिषद की इन नियुक्तियों में पूरा जांच दल कटघरे में है। इसमें शाखा लिपिक, नियुक्ति देने वाले अफसर, दस्तावेज सत्यापन दल, विधि से जुड़े लोगों की भूमिका संदिग्ध है। इसकी जांच अब स्थानीय पुलिस विस्तृत रूप से करेगी और उसी आधार पर कार्रवाई होगी। जानकार कहते हैं कि अभ्यर्थियों ने सबकुछ अभिलेखों में सही जानकारी दी तो उसकी जांच ठीक से क्यों नहीं हुई? बाद में इन्हें हटाने की नौबत क्यों आई? बताते हैं कि परिषद में हुईं अन्य भर्तियों व फर्जीवाड़ों की जांच को भी जांच दल इस केस में क्लब कर सकते हैं। जेटीए घोटाले से लेकर कई मामले शामिल बताए जा रहे हैं।


ये हैं रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- शिक्षक भर्ती की पात्र अभ्यर्थी योगेंद्री यादव को नौकरी नहीं देकर अपात्र व्यक्ति और कम नंबर वाले अभ्यर्थी को नौकरी दिया जाना।

- कनिष्ठ लिपिक भर्ती में अपात्र अभ्यर्थी रुकमणी नंदन शर्मा की ओर से खुद की उम्र की सही सूचना दिए जाने के बाद ओवरऐज होने पर भी एलडीसी पद पर नियुक्ति दिया जाना।
- अपात्र अभ्यर्थी प्रमिला देवी को हाईकोर्ट में जिला परिषद की ओर से अपात्र होने की सूचना देने के बाद एलडीसी पद पर नौकरी दिया जाना।

- अपात्र शिक्षक अभ्यर्थी कमल सिंह को आवेदन के एक साल बाद की डिग्री लगाए जाने पर भी शिक्षक पद पर नौकरी दिया जाना।



जिला परिषद अलवर में शिक्षक व लिपिकों की फर्जी नियुक्तियों की जांच करके रिपोर्ट भेज दी गई है। अब विस्तृत जांच संबंधित थाने की पुलिस करेगी और उसी आधार पर कार्रवाई होंगी।

- सुरेश कुमार, पुलिस निरीक्षक, एसओजी जयपुर