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अलवर जिले में बीमारी के साइलेंट अटैक के बीच परीक्षा देने से कतरा रहे विद्यार्थी, कोरोना काल में वायरल का भी खौफ

इस समय कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मौसमी बीमारियों के असर के चलते विद्यार्थी परीक्षा देने से कतरा रहे हैं। महाविद्यालयों की स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं चल रही है, वहीं स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं भी मंगलवार से प्रारम्भ हो रही है।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Sep 29, 2020

Matsya University Students Afraid Of Giving Exams In Corona Pandemic

अलवर जिले में बीमारी के साइलेंट अटैक के बीच परीक्षा देने से कतरा रहे विद्यार्थी, कोरोना काल में वायरल का भी खौफ

अलवर. सुप्रीम कोर्ट और सरकार के निर्देशों के बाद मत्स्य विश्वविद्यालय की ओर से स्नातक और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराई जा रही हैं। परीक्षाओं में तमाम कोरोना गाइड लाइन्स की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं लेकिन जिले में इस समय कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच मौसमी बीमारियों के असर के चलते विद्यार्थी परीक्षा देने से कतरा रहे हैं। महाविद्यालयों की स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं चल रही है, वहीं स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं भी मंगलवार से प्रारम्भ हो रही है। जिले में कोरोना के लोग वायरल से संक्रमित हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस समय वायरल फ़ैल रहा है।ऐसे में अधिकांश लोगों की कोरोना रिपोर्ट तो नेगेटिव आ रही है लेकिन वायरल और कोरोना के एक जैसे लक्षण होने के कारण लोगों में इसका डर बना हुआ है।

कोरोना से जुड़ा कारण तो बाद में होगी परीक्षा

विश्वविद्यालय की ओर से कोरोना संक्रमित विद्यार्थियों या इससे जुड़े अन्य कारण होने पर अलग से बाद में विशेष परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। इसके लिए विद्यार्थियों को उचित कारण प्रमाण के साथ परीक्षाओं के 3 दिन बाद तक विश्वविद्यालय की ईमेल अथवा विश्वविद्यालय में जमा कराना होगा।इस समय ऐसे कई विद्यार्थी हैं जिनके घर में वायरल का प्रकोप है ऐसे में वे परीक्षा देने को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।

स्क्रीनिंग के बाद मिलेगा प्रवेश

विद्यार्थियों की इस समस्या पर मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. यादव का कहना है कि परीक्षाएं कराने में खास एहतियात बरती जा रही हैं। हर परीक्षा के बाद सभी कमरे और टेबल सेनेटाइज करवाए जा रहे हैं। परीक्षा में आने से पहले विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। यहां कोई विद्यार्थी संदिग्ध नजर आता है तो उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जा रहा। उनकी परीक्षा बाद में करवाई जाएगी। कोरोना के आलावा विद्यार्थी वायरल के कारण बीमार है तो इसका उचित प्रमाण विश्वविद्यालय में दिखाकर विद्यार्थी बाद में परीक्षा में बैठ सकते हैं।