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एक म्यान में दो तलवार, खुदाई में मिली प्रतिमाएं देखने हर माह आ रहे पांच हजार से ज्यादा पर्यटक

लवर.शहर के सिटी पलेस में बना हुआ अलवर का संग्रहालय देशी विदेशी पर्यटकों को बहुत पसंद आता है। इस संग्रहालय में अस्त्र शस्त्र का अनमोल संग्रह है। दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ, राजकालीन वस्त्र व आभूषण, दुर्लभ पेंटिंग्स के अलावा ऐसी वस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है

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अलवर

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Jyoti Sharma

Oct 27, 2022

एक म्यान में दो तलवार, खुदाई में मिली प्रतिमाएं देखने हर माह आ रहे पांच हजार से ज्यादा पर्यटक

एक म्यान में दो तलवार, खुदाई में मिली प्रतिमाएं देखने हर माह आ रहे पांच हजार से ज्यादा पर्यटक

एक म्यान में दो तलवार राज्य के अन्य संग्रहालयों में देखने को नहीं मिलती हैं। जैसे की एक म्यानं में दो तलवार जो कहीं ओर नहीं दिखाई देती हैं। इन्हीं को देखने के लिए प्रतिदिन करीब दौ सो पर्यटक यहां आते हैं।

जिल्दसाजी के लिए जाने जाते हैँ हस्तलिखित ग्रंथ

संग्रहालय में तीन कमरों में अलवर, किशनगढ व जयपुर शैली के साथ साथ बूंदी शैली पेंटिंग्स, नंद किशोर की बनाई चांदी की मेज, जिसमें मछलियों के तरने का आभास होता है। हस्तलिखित ग्रंथ जो विशेष रूप से जिल्दसाजी के लिए जाने जाते हैँ इसमें बाबर नामा व आइने अकबरी के साथ साथ कुरान को प्रदर्शित किया गया है जो कि दुर्लभ है। इसके साथ ही कपडे़ से मढे़ हुए वाद्य यंत्र, महाराजा की विशेष साइकिल जिसमें टायर भी कपडे से बना हुआ है। इसके साथ ही चंदन व हाथीदांत की लकडी पर की गई कारीगरी, मिटटी के बनाएं बर्तन भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।इस संग्रहालय में पुराने छायाचित्रों का महत्वपूर्ण संग्रह है।

विशेष अवसरों पर प्रवेश निशुल्क

यहां प्रदर्शित सामग्री को देखने के लिए प्रतिदिन दौ सो से ज्यादा पर्यटक यहां आते हैं। विशेष मौके जैसे राजस्थान दिवस, मत्स्य उत्सव, संग्रहालय दिवस, हेरीटेज डे आदि मौकों पर पर्यटकों को प्रवेश नि शुल्क दिया जाता है। इस दिन पर्यटकों की संख्या कई गुना बढ जाती हैं। अलवर , दिल्ली व जयपुर के बीच में होने और मथुरा व वृंदावन के नजदीक होने के कारण यहां विदेशी पर्यटक भी बडी संख्या में आते हैं

जनवरी 2022 4543

फरवरी 5045

मार्च 5584

अप्रेल 5114

मई 4834

जून 6482

जुलाई 6836

अगस्त 5880

सितंबर 6689

वर्जन

संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुओं को बहुत ही सुंदर तरीके से सजाया गया है। संग्रहालय को देखने के लिए प्रतिदिन दौ सो के लगभग पर्यटक आते हैं। यहां रखी गई वस्तुएं ऐतिहासिक है। पर्यटकों तक इनकी जानकारी पहुंचे इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का भी सहारा लिया है। एक बार आने के बाद बार बार आना चाहते हैं।प्रतिभा यादव, संग्रहालयाध्यक्ष, अलवर।

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