
नवजातों पर पैदा होते ही मंडरा रहा है बड़ा खतरा, उनकी मां ही बीमारियों को दे रही बुलावा
अलवर . दुनिया में सबसे प्यारा रिश्ता मां और शिशु का होता है। एक मां ही जान सकती है कि उसके शिशु के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा है। लगता है कि अब माताओं को अपनी शिशुओं की सेहत की चिंता नहीं रहती जिसके चलते इन दिनों जनाना अस्पताल में हर तरफ मोबाइल की घंटियां बजती रहती है। यहां भर्ती हर दूसरी महिला के पास मोबाइल मिलना आम बात है। यह जानते हुए कि मोबाइल से नवजात शिशु की सेहत बिगड़ सकती है इसके बाद भी वो इसका उपयोग करती हैं।
प्रसूताओं का ख्याल रखने के लिए यहां नियुक्त नर्स और डाक्टर भी इनको इस खतरे से आगाह नहीं कर रहे है। कहीं ऐसा ना हो की आने वाले दिनों में शहर का हर बच्चा मोबाइल के विकरणों से निकलने वाली बीमारी का शिकार हो।
बुजुर्ग महिलाएं रखती थी ध्यान
पहले बुजुर्गो का कहना था कि प्रसव के बाद महिला का शरीर कमजोर हो जाता है। इसलिए उसके शरीर को आराम की जरुरत होती है। इसलिए ना तो आंखों से कुछ पढऩे दिया जाता है और ना ही किसी से अधिक बातचीत करने दी जाती थी। जिससे की प्रसुता का दिमाग शांत रहे।
हर दूसरी प्रसूता के पास मोबाइल
अस्पताल में भर्ती हर दूसरी प्रसुता महिला के पास मोबाइल रखा रहता है। वर्तमान में यहां पर 250 के लगभग महिलाएं भर्ती है। अधिकतर अपने पास ही मोबाइल को रखती है, या फिर गोद में, सिर के पास रखती है। इससे मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन दिमाग ओर शरीर को नुकसान पहुंचाता है। मोबाइल से कई घंटों तक बात करती हैं। इससे प्रसूता को दिमागी थकान तो होती ही है शिशु को भी भविष्य में खतरा हो सकता है।
डॉक्टरों की सलाह मानें
शिशुओं के पास मोबाइल नहीं रखा जाना चाहिए। मोबाइल पर बात भी कम की जानी चाहिए । इससे बच्चों का विकास, व्यवहार और सीखने की क्षमता पर असर पड़ता है। हम प्रसुताओं और परिजनों दोनों को बार बार मोबाइल के खतरे से आगाह करते हैं। लेकिन इसके बाद भी हमारी बात पर कोई ध्यान नहीं देता है।
-डॉ. सोमदत्त शर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ, राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय।
Published on:
03 Aug 2018 08:49 am
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