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राजस्थान की इस प्राचीन विरासत को है खतरा, दीवारें व पिलर छोड़ रहे जगह, पर्यटकों के साथ कभी भी हो सकता है हादसा

Moosi Maharani Ki Chatri : अलवर में मूसी महारानी की छतरी 84 खंबों पर टिकी है, लेकिन अब इसके खंबे जगह छोड़ रहे हैं।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Aug 11, 2019

Moosi Maharanai Ki Chatri Near Sagar Jalashya Alwar

राजस्थान की इस प्राचीन विरासत को है खतरा, दीवारें व पिलर छोड़ रहे जगह, पर्यटकों के साथ कभी भी हो सकता है हादसा

अलवर. राजस्थान में सामान्य ज्ञान की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थी तथा अलवर के जागरुक नागरिकों को अलवर की ऐतिहासिक विरासत मूसी महारानी के बारे में जानकारी अवश्य होगी। छतरी प्रशासन की ठीक नाक के नीचे बनी हुई है। आए दिन यहां विभागीय अधिकारियों के दौरे होते हैं लेकिन इसकी बदहाली पर किसी का ध्यान नहीं है। इसके अस्तित्व पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। सफेद संगमरमर व लाल पत्थर से बनी यह छतरी जर्जर होती जा रही है, इसके दीवारें जगह छेाडऩे लगी है।

ऊपरी मंजिल पर बने पिलर भी जगह छोड़ रहे हैं और गिराऊ हालत में हैं। जो कभी भी सैलानियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। इमारत के सबसे ऊपरी भाग पर पौधे उग आए हैं। बरामदों में लगे दरवाजे टूटे हुए हैं। जगह जगह से बदरंग लाल पत्थर झांक रहा है। इमारत में पानी का रिसाव होने से पत्थर जगह छोड़ते जा रहे हैं। छज्जे भी बेहाल में है। असामाजिक तत्व इमारत को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसमें बने हुए रामायण व भागवत आदि के चित्र भी पानी के रिसाव से खराब हो गए हैं।

केमिकल वाश के धब्बे

गौरतलब है कि पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने करीब पांच साल पूर्व मूसी महारानी की छतरी पर सौंदर्यीकरण का काम करवाया था। विभाग के अधिकारियों ने सही मॉनिटरिंग नहीं की। नतीजा ये हुआ कि सफेद संगमरमर की छतरी पर काले दाग लग गए। छतरी को साफ करवाने वाले ठेकेदार ने पैसे बचाने के लिए केमिकल से धो दिया। जिससे सफेद संगमरमर काला हो गया। चमक पूरी तरह खराब हो गई। इसके बाद से ये छतरी अपने वास्तविक रूप में कभी नहीं आ पाई।महाराजा विनयसिंह ने बनवाई थी छतरीछतरी का निर्माण अलवर के महाराजा बख्तावर सिंह के बेटे विनय सिंह ने सन 1815 में करवाया था। मूसी रानी महाराज बख्तावर सिंह के साथ चिता पर बैठ गई थी। उनकी स्मृति में ही यह छतरी बनवाई गई है। यह छतरी मुगलकालीन व राजपूती स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। छतरी में 84 खम्भे हैं। वर्तमान में यह पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ऐतिहासिक इमारतों में शामिल है।

मूसी महारानी की छतरी एेतिहासिक व संरक्षित स्मारक है। पर्यटकों के साथ कोई हादसा ना हो इसके लिए गिराऊ पिल्लर व खराब हो रही दीवारों के लिए मुख्यालय जयपुर को लिखा गया है। यहां लगे पौधों को पूर्व में भी हटाया गया था । इसके बारे मेंे भी मुख्यालय को सूचना दी गई है। वहां से प्रस्ताव पास होने पर ही कुछ कार्रवाई हो पाएगी।
प्रतिभा यादव, संग्रहालयाध्यक्ष, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, अलवर।