
परिवार के साथ उमाकांत शर्मा। फोटो पत्रिका
भिवाड़ी (अलवर)। मुजफ्फरनगर (यूपी) के एक साधारण परिवार में जन्मे उमाकांत शर्मा ने साबित कर दिया कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर सपना साकार किया जा सकता है। एक समय लाखों रुपए मासिक वेतन वाली नौकरी छोड़ने का साहस दिखाने वाले उमाकांत आज खुद का उद्योग स्थापित कर 50 लोगों को रोजगार दे रहे हैं और हर महीने करीब 20 लाख रुपए वेतन वितरित कर रहे हैं।
वर्ष 1967 में जन्मे उमाकांत के पिता राशन की दुकान चलाते थे। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने 1986 में डिप्लोमा किया और छोटे वेतन से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें मात्र 1000 रुपए मासिक वेतन मिला। मेहनत और अनुभव के साथ वे विभिन्न कंपनियों में कार्य करते हुए आगे बढ़ते गए।
करीब दो दशक तक नौकरी करने के बाद उनका वेतन दो लाख रुपए प्रतिमाह तक पहुंच गया, लेकिन मन में कुछ अपना करने का जज्बा लगातार बना रहा। आखिरकार 2016 में उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए नौकरी छोड़ दी और खुशखेड़ा में खरीदे गए भूखंड पर हाइड्रोलिक फिक्स्चर निर्माण की फैक्ट्री स्थापित की।
शुरुआती साल आसान नहीं रहे। पहले वर्ष में टर्नओवर 50 लाख रुपए ही रहा, जो उनकी पिछली आय से कम था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत के दम पर अगले ही साल टर्नओवर 2 करोड़ और फिर 2019-20 में 5 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। कोरोना काल ने जरूर रफ्तार धीमी की, लेकिन उमाकांत ने हिम्मत नहीं हारी। आज उनकी फैक्ट्री फिर से गति पकड़ चुकी है और 50 कर्मचारियों के साथ सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
उमाकांत शर्मा का मानना है कि सफलता का एकमात्र मंत्र मेहनत है। वे युवाओं को संदेश देते हैं कि कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय तक एकांत में की गई मेहनत ही व्यक्ति को एक दिन सफलता की रोशनी में लाती है।
Published on:
06 Apr 2026 02:28 pm
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