
अलवर। उस मां की क्या मनोस्थिति होगी जिसने अस्पताल में दूसरी बार अपने बच्चे को जन्म के बाद उसे खो दिया। मामला राजकीय महिला अस्पताल अलवर का है। नवजात के परिजन ने चिकित्सक सहित स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
पीड़ित काला कुआं निवासी प्रेम प्रकाश भाटिया ने बताया कि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां चिकित्सकों ने दबाव डालकर उससे ऑपरेशन के लिए लिखवाया। जबकि उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हो रही थी और ऑपरेशन की जरुरत नहीं थी।
इसके बाद 29 जनवरी को सुबह 8 बजे ऑपरेशन से उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। इसके बाद से उसकी बच्ची लगातार रो रही थी और मां का दूध भी नहीं पी रही थी। इसके साथ ही उसकी पत्नी को भी दर्द हो रहा था, लेकिन चिकित्सक से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी वह देखने के लिए नहीं आया। इसके बाद मंगलवार रात करीब 2 बजे नवजात बालिका की मौत हो गई।
नर्सिंग स्टाफ ने कहा, इंजेक्शन खत्म हो गया
पीड़ित का आरोप है कि उसकी बच्ची के जन्म के बाद हाथ व पैर पर टीके लगाए गए थे। इसके अगले दिन जब वह बच्ची को गोद में लेकर इंजेक्शन लगवाने गया नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची के पैर में तो इंजेक्शन लगा दिया, लेकिन हाथ में लगने वाले इंजेक्शन के खत्म होने की जानकारी दी। नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हो गए हैं, बच्ची ठीक है, अगले दिन इंजेक्शन लगवा लेना।
इस संबंध में पीड़ित की ओर से कोतवाली थाने में डॉ. टेकचंद सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।
2012 में बेटे की भी हो चुकी मौत
पीड़ित ने बताया कि इससे पहले साल 2012 में उसके ऑपरेशन से बेटा हुआ था। उसका वजन भी साढ़े 3 किलो था। तब भी उसने इसी चिकित्सक को दिखाया था, लेकिन उस दौरान भी चिकित्सक की लापरवाही से 3 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।
Published on:
01 Feb 2024 02:54 pm
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