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सावधान! ब्लैक फंगस के बाद राजस्थान में तेजी से पैर पसार रही यह गंभीर बीमारी, बच्चों को खतरा अधिक, इलाज भी महंगा

चिकित्सालयों में एमआइएस - सी यानि मल्टीसिस्टम इनफलमेंट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रन के करीब 6 मरीज अभी उपचार ले चुके हैं।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Jun 16, 2021

multisystem inflammatory syndrome in children Disease In rajasthan

सावधान! ब्लैक फंगस के बाद राजस्थान में तेजी से पसार रही यह गंभीर बीमारी, बच्चों को खतरा अधिक, इलाज भी महंगा

अलवर. कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में ब्लैक फंगस के बाद अब बच्चों में मल्टीसिस्टम इनफलमेंट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रन (एमआइएस- सी) बीमारी तेजी से बढ़ रही है। पंजाब, गुजरात, गोवा के बाद अब राजस्थान में भी इसकी पुष्टि हो चुकी है। इधर, अलवर में भी बच्चों में इसके लक्षण मिले हैं। हालांकि सरकारी अस्पताल में चिकित्सक अभी भी इस बीमारी की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। लेकिन निजी चिकित्सालयों में एमआइएस - सी यानि मल्टीसिस्टम इनफलमेंट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रन के करीब 6 मरीज अभी उपचार ले चुके हैं। जबकि शहर के अनेक निजी चिकित्सालयों में छोटे बच्चों को इसके लक्षण मिलने पर भर्ती कराया गया है।सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन उपलब्ध नहींदवाइयों के होलसेल विक्रेता मुकेश विजय ने बताया कि इस बीमारी के लिए इंजेक्शन की डिमांड आई थी। लेकिन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। इधर, अलवर के सरकारी अस्पताल में अभी तक इस बीमारी के उपचार के लिए लगाया जाने वाला इंजेक्शन ही उपलब्ध नहीं है। बीमार बच्चे को उसके वजन के अनुसार लगाया जाता है। इधर, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डाक्टर सुनील चौहान ने बताया कि अलवर में इस बीमारी का कोई बच्चा सरकारी अस्पताल में नहीं आया है। जरुरत होने पर इंजेक्शन की मांग की जाएगी।

निजी अस्पताल में उपचार ले चुके छह बच्चे

हरीश हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डाक्टर दीपेश गुप्ता ने बताया कि जून की शुरुआत से अब तक एमआइएस- सी के करीब पांच से छह मामले आ चुके हैं। जिनको उपचार के बाद घर भेजा जा चुका है। दो बच्चे इसी सप्ताह सही होकर गए हैं। यह बीमारी कोरोना से ठीक होने के 2 से 8 सप्ताह के बाद आती है। कोरोना से शरीर का इम्युनिटी सिस्टम बदल जाता है। इससे अलग- अलग लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे बुखार होना, आंख लाल, होठ लाल, जीभ लाल, हाथ पैर में लाल चक्त्ते हो जाना, हार्ट की नसों में खून का थक्का बनना, किडनी व लीवर प्रभावित होना शामिल है। समय पर इलाज नहीं कराने से यह बीमारी जानलेवा बन जाती है।

महंगा है इस बीमारी का इलाज

डॉ. दीपेश गुप्ता ने बताया कि यह बीमारी यह वर्षों पहले होने वाली पुरानी बीमारी कावासाकी के नाम से भी जानी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी वाले बच्चों को लगाए जाने वाले इंजेक्शन की कीमत 16 हजार रुपए है। यह इंजेक्शन अभी अलवर में उपलब्ध नहीं है, डिमांड होने पर मंगवाया जा रहा है। यह इंजेक्शन बच्चे के वजन के अनुसार दिया जाता है। दस साल के बच्चे को जिसका वजन करीब 30 किलो होता है। इसमें करीब सवा लाख रुपए के इंजेक्शन लग जाते हैं। इसमें कभी- कभी बुखार के साथ उल्टी दस्त होते हैं। लोग इन लक्षणों को सामान्य समझकर ध्यान नहीं देते हैं।