खेरली. अपने भाई का अनुकरण कर सांसारिक जीवन के सुख त्याग एवं समर्पण के मार्ग पर अग्रसर कस्बे की बेटी मुमुक्षु नेहा जैन का वरसीदान वरघोडा बड़े धूमधाम से कस्बे के विभिन्न मार्गो से होकर निकाला। जिसे देखकर हर कोई श्रद्धावनत होकर मुमुक्षु की प्रशंसा करने से पीछे नहीं रहा।
बैंड-बाजे एवं ढोल-नगाड़े के साथ वरघोडे में महिला-पुरुष जहां नाचते हुए आनंद मग्न थे, वहीं महिलाएं कलश लेकर मार्ग प्रशस्त कर रही थी। विभिन्न सजे हुए रथों में झांकियाें के साथ मुमुक्षु के माता-पिता चल रहे थे। यात्रा में भव्य रथ में पूर्ण श्रृंगारित मुमुक्षु नेहा जैन वरसीदान करतीं हुई विभिन्न उपहार लुटाती जा रही थीं। इस दौरान कई स्थानों पर वरघोड़े पर पुष्प वर्षा की गई।
24 को करेंगी दीक्षा ग्रहण
कस्बे के सेढ का कजोड़ी मोहल्ला निवासी बालकिशन जैन एवं कांता जैन की पुत्री मुमुक्षु नेहा 24 जनवरी पौष सुदी चौदस को पद्मभूषण आचार्य भगवंत रत्न सुंदर सुरीश्वर महाराज के सानिध्य में दीक्षा ग्रहण कर रही हैं। इससे पूर्व के कार्यक्रमों में शक्रस्तव पूजा, हल्दी, मेहंदी, चौविहार, बिंदोली, नवकारसी वरसीदान वरघोडा, धर्म सभा, अंतिम वायना, अष्ट मंगल दर्शन, विजय तिलक, वैराग्य बंधन आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें जैन समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
त्याग एवं समर्पण परिवार की रही है भावना
नेहा के परिवार में माता-पिता सहित दो भाई हैं। जिनमें छोटा भाई अरिहंत जैन दो वर्ष पूर्व दीक्षा लेकर वीर सागर मुनि बन चुके हैं। एक भाई विवाहित हैं, जो जयपुर में कंप्यूटर का व्यवसाय करते हैं। मुमुक्षु नेहा ने स्नातक की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रखी है। तीन साल से साध्वी भगवन्तों के साथ रहकर 26 साल की उम्र में प्रभु वीर के मार्ग पर चलने के लिए अग्रसर हुई हैं। उन्होंने पंच प्रतिक्रमण, 9 स्मरण, जीव विचार, नव तत्व आदि अध्ययन किया है तथा साध्वी भगवंतों के साथ 2000 किमी से अधिक विहार कर चुकी हैं। इसके अतिरिक्त उपधान तप, वर्षीतप, वर्धमान तप की 10 ओली, 11 उपवास व 64 प्रहरी पौषध कर तपमार्ग में अच्छी सफलता पाई हैं। अब वे साध्वी धैर्यनिधिश्रीजी म.सा. की शिष्या साध्वी ऋषिनिधि श्रीजी म.सा. के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने जा रही हैं।