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. सरिस्का के समीप मार्बल खान बंद होने से उद्योगों का बढ़ा संकट

सरिस्का बाघ परियोजना के इको सेंसेटिव जोन का अब तक निधाZरण नहीं होने से सरिस्का के समीप ज्यादातर मार्बल खानें बंद हो चुकी है। इसका विपरीत असर अलवर जिले के उद्योगों पर पड़ा है। सरकार की ओर से सरिस्का एवं आसपास के क्षेत्रों में िस्थत मार्बल खानों को सीटीओ नहीं मिलने से उद्योगों के लिए कच्चा माल मार्बल खंडों का संकट खड़ा हो गया है।

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. सरिस्का के समीप मार्बल खान बंद होने से उद्योगों का बढ़ा संकट

. सरिस्का के समीप मार्बल खान बंद होने से उद्योगों का बढ़ा संकट,. सरिस्का के समीप मार्बल खान बंद होने से उद्योगों का बढ़ा संकट,. सरिस्का के समीप मार्बल खान बंद होने से उद्योगों का बढ़ा संकट

. सरिस्का के समीप मार्बल खान बंद होने से उद्योगों का बढ़ा संकट
- सरिस्का के आसपास बंद खानों के शुरू होने की उम्मीद अब उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी

- जिले के टहला क्षेत्र में सीटीओ नहीं बढने से ज्यादातर मार्बल की खाने हुई बंद

अलवर.

सरिस्का बाघ परियोजना के इको सेंसेटिव जोन का अब तक निधाZरण नहीं होने से सरिस्का के समीप ज्यादातर मार्बल खानें बंद हो चुकी है। इसका विपरीत असर अलवर जिले के उद्योगों पर पड़ा है। सरकार की ओर से सरिस्का एवं आसपास के क्षेत्रों में िस्थत मार्बल खानों को सीटीओ नहीं मिलने से उद्योगों के लिए कच्चा माल मार्बल खंडों का संकट खड़ा हो गया है।

सरिस्का एवं आसपास का क्षेत्र मार्बल जोन है। यहां बड़ी संख्या में मार्बल की खानें हैं। इन खानों से अलवर जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अनेक स्थानों पर उद्योगों को कच्चा माल मार्बल खंडा की सप्लाई होता है। इतना ही नहीं इन खानों से आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता रहा है। लेकिन इको सेंसेटिव प्रारूप का अतिम प्रकाशन नहीं होने से यहां ज्यादातर खनन कार्य बंद हो चुका है या बंद होने के कगार पर है। सरिस्का से एक किलोमीटर के दायरें मार्बल की करीब 148 खाने अभी बंद हैं।

सरकार के आदेश उद्योगों को पड़ रहे भारी

सरकार की ओर से पूर्व में अलवर जिले की अरावली पर्वतमाला में खनन कार्य पर रोक लगाने तथा बाद में सरिस्का से कभी 10 किलोमीटर तो कहीं एक किलोमीटर तक खनन कार्य पर रोक के आदेश जारी किए गए। सरकार की ओर से जारी आदेशों के चलते सरिस्का के आसपास क्षेत्र में खानें बंद होती गई। इससे मार्बल आधारित उद्योगों पर कच्चा माल का संकट उत्पन्न हो गया।

अब सरिस्का सेंसेटिव जोन की मार

सरिस्का बाघ परियोजना का इको सेंसेटिव जोन का ड्राफ्ट पब्लिकेशन करीब एक साल पहले हुआ था। लेकिन इसका अंतिम प्रकाशन अब तक नहीं किया जा सका है। सरिस्का के इको सेंसेटिव जोन का निधाZरण नहीं होने के कारण सरकार ने आसपास के क्षेत्र में खनन कार्य के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति व सीटीओ पर रोक लगा दी।

उद्योगों पर भी संकट छाया

मार्बल खान बंद होने का सबसे ज्यादा असर डोलोमाइट पाउडर बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है। देश भर में मार्बल के सफेद पाउडर की बड़ी मांग है। राजगढ, अलवर के एमआइए में बड़ी संख्या में डोलोमाइट पाउडर पीसने के उद्योग लगे हैं, इनमें मार्बल खंडा की सप्लाई टहला खनन क्षेत्र व सरिस्का के आसपास खानों से होती है। इनमें से ज्यादातर खाने बंद होने से उद्योगों की मार्बल खंडा की पूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के रोजगार पर संकट आने लगा है।

अब सरकार से उम्मीद बढ़ी

सरिस्का के आसपास मार्बल खानों को शुरू कराने के लिए जिले के उद्यमी पिछले कई दिनों से प्रयासरत हैं। उद्योग मंत्री शकुंतला रावत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री टीकाराम जूली, वन मंत्री हेमाराम चौधरी सहित प्रदूषण नियंत्रण मंडल व खनन विभाग के उच्च अधिकारियों को उद्यमियाें ने समस्या से अवगत कराया। बाद में उद्यमियों के साथ मंत्रियों के समूह एवं उच्च अधिकारियों की बैठकें हुई। गत मंगलवार को भी इस समस्या के निराकरण के लिए बैठक हुई, वहीं गुरुवार को भी जयपुर में वन मंत्री की मौजूदगी में जिले के कैबिनेट मंत्रियों सहित उच्चाधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। यही कारण है कि उद्यमियों की नजरें अब मंत्रियों की मौजूदगी में होने वाली बैठक पर टिकी है।