
नए जिलों को विकास के लिए चाहिए 2 हजार करोड
अब बारी नए जिलों के विकास की...खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ के लिए चाहिए 2 हजार करोड़
- इन जिलों का बनाना होगा पूरा ढांचा, कार्यालयों की स्थापना व उनके भवन बनाने में पैसे खर्च होंगे
- विकास के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना सरकार के लिए नहीं है आसान, कामों में हो सकती देरी
नए जिलों के विकास की अब बारी है लेकिन विकास का खाका खींचने व उसे धरातल पर उतारने में सरकार को पसीने आएंगे। एक्सपर्ट कहते हैं कि खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ जिले के विकास के लिए कम से कम 2 हजार करोड़ चाहिए। ये रकम मिलेगी तभी जिला मुख्यालय वहां स्थापित हो सकेगा। इस रकम को लाने में नेता दिलचस्पी कितनी दिखाते हैं, ये उनके ऊपर निर्भर है।
कांग्रेस सरकार ने अगस्त में नए जिले बनाए थे। यहां किराये के भवनों में कलक्ट्रेट संचालित किया। इसके अलावा कृषि, शिक्षा, जिला परिषद, स्वास्थ्य विभाग आदि का संचालन भी किराये के भवनों में किया गया। स्टाफ भी नाममात्र का ही यहां लगाया गया। इन जिलों के पास बड़ी बैठकें करने के लिए न तो कोई हॉल है और न कोई भवन। सरकारी स्ट्रैक्चर बना हुआ नहीं है। सभी सरकारी भवनों के निर्माण पर ही करीब एक जिले में 500 करोड़ रुपए तक खर्च आने की संभावना बताई जा रही है। इसके अलावा मुख्यालय के विकास के लिए सड़क निर्माण से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया कराने में भी मोटी रकम खर्च होगी। जिला मुख्यालय से तहसीलों को सड़क मार्ग से जोड़ने व पानी की समुचित व्यवस्था करने, सफाई आदि का खाका खींचने के लिए भी पैसे चाहिए।
एक प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि सरकार के खजाने में पैसे नहीं हैं। सरकार के सामने ही चुनौती है कि गरीबों के लिए चल रही योजनाओं को संचालन ठीक से कर सके। नई योजनाएं लाना भी आसान नहीं है। हालांकि लोकसभा चुनाव के नजदीक होने के चलते सरकार कुछ पैसे नए जिलों के लिए आवंटित कर सकती है।
Published on:
05 Dec 2023 11:41 am
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