
यूआईटी अलवर की आने वाली नई आवासीय योजनाओं में ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के लिए 25 प्रतिशत जमीन अलग से विकसित की जाएगी। हर योजना में ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के भूखण्ड भी छोड़े जाएंगे। ताकि गरीब अपनी आय के अनुसार छोटे भूखण्ड खरीद सके।
अभी तक यूआईटी की आवासीय योजनाओं में अधिकतर 150 से 400 वर्गमीटर के भूखण्ड छोड़े जाते रहे हैं। जो गरीब के बूते से बाहर होते हैं, लेकिन अब नई योजनाओं में गरीब को 75 वर्गमीटर से 150 वर्गमीटर के भूखण्ड भी मिलेंगे।
नई आवासीय योजनाओं में देरी का कारण
शहर में यूआईटी की दो प्रमुख व बड़ी विज्ञान नगर व शालीमार आवासीय योजनाओं में देरी होने का एक कारण यह भी रहा है कि ले-आउट में कई बार संशोधन करके ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के लिए 25 प्रतिशत जमीन छोड़ी गई। यूआईटी ने पहले सामान्य ले-आउट तैयार किए। जिनको बाद में पुन: तैयार कराए गए। हाल में विज्ञान नगर आवासीय योजना के ले-आउट में पहली बार गरीबों के लिए छोटे भूखण्ड बनाए गए हैं। जिसके बार नक्शे को मंजूरी मिली है।
अब शालीमार में होगी मशक्कत
अब यूआईटी को शालीमार आवासीय योजना में भी 25 प्रतिशत जमीन अलग से छोडऩे के लिए पुन: ले-आउट संशोधन करना पड़ेगा। पूर्व में तैयार किया गया ले-आउट सरकार को भेजा हुआ है, लेकिन अब नए सिरे से तैयार करना पड़ेगा। फिर इस योजना में भी गरीब परिवारों को सैकड़ों भूखण्ड मिल सकेंगे।
करना पड़ेगा संशोधन
हिमांशु गुप्ता सचिव यूआईटी अलवर ने बताया कि यूआईटी की आवासीय योजनाओं में भी ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के लिए अलग से विकसित जमीन छोड़ी जाएगी। जिसके कारण शालीमा का ले-आउट भी संशोधित करना पड़ेगा।
Published on:
01 Oct 2016 12:36 pm
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