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मोदी सरकार के नौ साल, कने​क्टिविटी भरपूर, पानी अभी दूर

केन्द्र की मोदी सरकार ने नौ साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। इस दौरान अलवर जिले को बड़े शहरों से कनेक्टिविटी मामले में केन्द्र सरकार का भरपूर योगदान मिला। लेकिन चम्बल का पानी और रेपिड रेल अलवर तक आने का सपना पूरा नहीं हो पाया। आइए जानते है केन्द्र की मोदी सरकार ने नौ साल में अलवर को क्या दिया और किसका रहा इंतजार।

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अलवर

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Prem Pathak

May 27, 2023

मोदी सरकार के नौ साल, कने​क्टिविटी भरपूर, पानी अभी दूर

रैपिड रेल, जिसका अलवर जिले को है इंतजार

अलवर. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार नौ साल का सफर पूरा कर चुकी है। इस दौरान केन्द्र सरकार में अलवर का भी पूरा प्रतिनिधित्व रहा, लेकिन पानी और रेपिड रेल का सपना अधूरा ही रहा। हालांकि इस दौरान अलवर को दिल्ली- मुम्बई एक्सप्रेस वे, पनियाला- बडौदामेव नेशनल हाइवे, वंदे भारत एक्सप्रेस सहित अनेक सौगातें भी केन्द्र की ओर से मिली।

मोदी दूसरे टर्म के चार साल पूरे कर चुकी है और अगले वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन अलवर जिले की कुछ बड़ी समस्याएं अभी यथावत है। जिले की सबसे बड़ी समस्या पेयजल समस्या है, लेकिन यह मुद्दा पिछले चार साल से राजनीतिक आरोप- प्रत्यारोप में अटक कर रह गया। नतीजा यह रहा कि अलवर जिले के लोग पानी का अब भी इंतजार कर रहे हैं।

सतही जल परियोजना ही पेयजल समस्या का निराकरण

अलवर जिले में पेयजल संकट का निराकरण सतही जल परियोजना से ही संभव है। अलवर में चम्बल या यमुना से ही पानी लाना संभव है। इसके लिए पूर्व में कई बार प्रस्ताव बने, लेकिन फाइलों तक ही सिमटे रहे। प्रदेश में गत भाजपा सरकार के दौरान अलवर सहित प्रदेश के 13 जिलों के ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट बना। करीब 36 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के इस प्रोजेक्ट को लेकर पिछले चार सालों में केन्द्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की ओर से खूब बयानबाजी हुई, लेकिन योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी। इस कारण अलवर में पेयजल संकट के निराकरण का अब भी लोगों को इंतजार ही है।


रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम को केन्द्र की मंजूरी नहीं मिली


रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम के तहत बहरोड़, शाहजहांपुर तक रैपिड रेल की शुरुआत होनी थी, इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली से हरियाणा होकर बहरोड़, शाहजहांपुर तक रैपिड रेल का संचालन किया जाना है। अगले चरण में यह रैपिड रेल अलवर तक चलनी है। हरियाणा सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी पहले ही दी जा चुकी है। इसकी डीपीआर तैयार हो चुकी है, लेकिन अभी इसे केन्द्र सरकार की मंजूरी नहीं मिल पाई है। इस कारण रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम अभी अटका है।

अलवर की बड़े शहरों से कनेक्टिविटी हुई बेहतर

बीते 9 साल में अलवर जिले की देश के बड़े शहरों से कनेक्टिविटी बेहतर हो सकी है। इसमें सबसे बड़ा रोल दिल्ली- मुम्बई एक्सप्रेस का शुरू होना रहा। वहीं पनियाला से बड़ौदामेव नेशनल हाइवे का निर्माण भी जल्द शुरू होना है। साथ ही सरिस्का में करीब 23 किमी एलिवेटेड रोड की डीपीआर तैयार करने सहित कई नए रोड की मंजूरी से अलवर जिला कनेक्टिविटी मामले में अग्रणी हुआ है। साथ ही अलवर में इएपीएफओ का क्षेत्रीय कार्यालय खुलना, ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज का संचालन सहित कई अन्य सौगात भी केन्द्र की ओर से इस दौरान अलवर वासियों को दी गई।