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अब सरिस्का में दहाड़ेगा रणथंभोर का बाघ, पयर्टकों का बढ़ेगा रूझान

रणथंभौर से सड़क मार्ग से सरिस्का में रात डेढ़ बजे पहुंचा टी-113 बाघ

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अब सरिस्का में दहाड़ेगा रणथंभोर का  बाघ, पयर्टकों का बढ़ेगा रूझान

अब सरिस्का में दहाड़ेगा रणथंभोर का बाघ, पयर्टकों का बढ़ेगा रूझान


सवाईमाधोपुर. अलवर. रणथंभोर में अब तक टी-113 के नाम की पहचान रखने वाला युवा बाघ अब सरिस्का टाइगर रिजर्व की शान बढ़ाएगा। रविवार को रणथंभोर टाइगर रिजर्व के तालेड़ा रेंज के छोलादह और बेड़ा कुई के बीच के वन क्षेत्र में ट्रेंकुलाइज किया। बाघ टी-113 को ट्रंक्यूलाइज कर वन अधिकारियों के सानिध्य में सरिस्का के लिए रवाना किया गया। युवा बाघ की उम्र करीब पांच साल है और यह रणथंभोर की बाघिन टी-19 कृष्णा की संतान है। रणथम्भौर पार्क से सरिस्का के लिए पाचवीं बार टाइगर भेजा गया है।
अलवर जिले के वन प्रेमियों के लिए खुशखबर है। रणथंभौर से एक युवा बाघ सरिस्का को मिला है। अब सरिस्का में बाघों का कुनबा बढ़कर 25 पहुंच गया है। इनमें 13 बाघिन, 8 बाघ एवं 4 शावक शामिल हैं।
2008 से पांच बार में सरिस्का भेजे 10 टाइगर : रणथम्भौर से अन्य टाइगर रिजर्व में बाघ शिफ्ट करने की पहली शुरूआत वर्ष 2008 में हुई थी। उस वक्त बाघ विहीन हो चुके अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिजर्व में रणथम्भौर से पहला बाघ भेजा गया था, जिसे रणथम्भौर में दारा के नाम से जाना जाता था। इसके बाद साल 2009 में एक साथ पांच बाघ रणथम्भौर से सरिस्का भेजे गए। वर्ष 2010 में भी एक साथ दो बाघों को रणथम्भौर पार्क से सरिस्का भेजा गया था। रणथम्भौर से सरिस्का में इससे पहले 8 बाघ- बाघिनों को शिफ्ट किया जा चुका है। इनमें टी.1, टी.7, टी.10, टी.12, टी.18, टी.44, टी.51 और टी.52 शामिल हैं। आखिरी बार 2018 में रणथम्भौर से बाघ टी-75 को सरिस्का भेजा गया था। हालांकि दो माह बाद ही सरिस्का में बाघ टी-75 की मौत हो गई थी। इस प्रकार अब पांचवीं बार सरिस्का के लिए 10 वां टाइगर भेजा गया है।


तालेड़ा रेंज में किया ट्रंक्यूलाइज
नेशनल टाइगर कनजर्वेशन ऑथरिटी (एनटीसीए) की ओर से सरिस्का व मुकुंदरा में बाघों को शिफ़्ट करने की अनुमति देने के बाद पिछले करीब एक सप्ताह से वन विभाग की ओर से दो बाघों को शिङ्क्षफ्टग करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए विभाग ने चार बाघों को चिह्नित किया था। विभाग की टीम दो दिनोंं से लगातार बाघों को ट्रेस करने के प्रयास कर रही थी। शनिवार को भी टीम ने देर शाम तक प्रयास किया लेकिन टीम को सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद रविवार को तालेडा रेंज से बाघ 113 को ट्रेंकुलाइज करने में सफलता मिल सकी। इस दौरान रणथम्भौर बाघ परियोजना के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) सेडूराम यादव सरिस्का के फील्ड डायरेक्टर आरएन मीणा, रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक संग्राम ङ्क्षसह, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक संजीव शर्मा, रणथम्भौर की रेस्क्यू टीम प्रभारी राजवीर ङ्क्षसह, जसकरण मीणा आदि
मौजूद रहे।

यूं चला घटना क्रम
7.00 बजे जंगल में पहुंची वन विभाग की टीम
7.20 के करीब वनविभाग की टीम ने ट्रेङ्क्षकग की शुरू
4 घंटे की तलाश में भी नहीं मिली सफलता
11.30 पर टीम ने तालेडा वन क्षेत्र में किया लंच
12.00 बजे के बाद फिर शुरू हुई तलाश
4.38 पर टीम ने बाघ को किया टे्रकुंलाइज
25 मिनट तक बाघ का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
5.40 बजे बाघ को सड़क मार्ग से सरिस्का किया रवाना।

&बाघ टी-113 को तालेडा से ट्रेंकुलाइज कर सरिस्का रवाना किया गया है। जहां तक मुकुंदरा में टाइगर शिङ्क्षफ्टग का सवाल है तो यह अभी बाद की बात है।
- सेडुराम यादव, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।

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