8 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकार का खजाना ऐसे खाली कर रहे अफसर

पीडब्ल्यूडी की एक गलती से प्रदेश सरकार को 59 लाख का फटका लग गया। यानी सरकारी खाते से ये रकम दोबारा टेंडर करने पर अधिक देनी पड़ी। पहला टेंडर मुख्य अभियंता कार्यालय जयपुर से किया गया था, जिसे स्थानीय अफसरों ने यह कहते हुए आगे नहीं बढ़ाया कि संबंधित ठेकेदार की शिकायत मिली थी। बाद में उसी ठेकेदार को अफसर क्लीनचिट देने की बात कहकर काम करने के लिए कहा लेकिन तब तक काफी समय हो चुका था और ठेकेदार ने काम से इनकार कर दिया। ये मामला अब लोकायुक्त में पहुंचा है।
2 min read
Google source verification

अलवर

image

susheel kumar

Feb 04, 2024

सरकार का खजाना ऐसे खाली कर रहे अफसर

सरकार का खजाना ऐसे खाली कर रहे अफसर

पीडब्ल्यूडी की एक गलती से सरकार को लगा 59 लाख का फटका

- 10 सड़कों के निर्माण की जिम्मेदारी जिस ठेकेदार को दी, उसका वर्कऑर्डर समय पर नहीं हुआ जारी, अफसर बोले- ठेकेदार पर थे आरोप

- बाद में पीडब्ल्यूडी ने उसी ठेकेदार को दी क्लीनचिट, 2 माह बाद वर्कऑर्डर जारी करने को कहा लेकिन तब ठेकेदार ने काम से कर दिया इनकार
- सरकार का था दबाव, पीडब्ल्यूडी ने टुकड़ों में किए टेंडर, उस पर अधिक रकम हुई खर्च, मुख्य अभियंता ने पहले किया था टेंडर

पीडब्ल्यूडी की एक गलती से प्रदेश सरकार को 59 लाख का फटका लग गया। यानी सरकारी खाते से ये रकम दोबारा टेंडर करने पर अधिक देनी पड़ी। पहला टेंडर मुख्य अभियंता कार्यालय जयपुर से किया गया था, जिसे स्थानीय अफसरों ने यह कहते हुए आगे नहीं बढ़ाया कि संबंधित ठेकेदार की शिकायत मिली थी। बाद में उसी ठेकेदार को अफसर क्लीनचिट देने की बात कहकर काम करने के लिए कहा लेकिन तब तक काफी समय हो चुका था और ठेकेदार ने काम से इनकार कर दिया। ये मामला अब लोकायुक्त में पहुंचा है। विभाग के कुछ अफसरों पर गंभीर आरोप हैं। बताते हैं कि अब वहां से प्रशासन के जरिए जवाब मांगा गया है।

मुख्य अभियंता कार्यालय जयपुर ने 10 सड़कों का टेंडर किया। इनमें दिवाकरी, बेलाका, राजगढ़ रोड से अलवर बाईपास, भूगोर से मदनपुरी, पृथ्वीपुरा से इमतीपुरा, बल्लाना से नांगल, शाहपुर, विजय मंदिर से ठेकरा, इंदोक, मुंडिया खेड़ा की सड़कों का काम होना था। अगस्त 2022 में टेंडर किया गया। ये काम निर्धारित दरों से 6.50 प्रतिशत कम में मैसर्स करण यादव को 3.22 करोड़ में दिया गया। मुख्य अभियंता के बाद इसका वर्क ऑर्डर पीडब्ल्यूडी अलवर के अफसरों को जारी करना था लेकिन यहां अफसरों ने नहीं किया। एक दूसरे मामले की शिकायत में ये मामला अटकाए रखा। जांच कराई लेकिन 2 माह बाद उन्हें क्लीनिचिट दे दिया। उसके बाद ठेकेदार से कहा कि वह काम करें लेकिन तब ठेकेदार ने मना कर दिया। कहा कि करीब 3 माह तक काम डिले किया गया। परेशान किया। उसके बाद पीडब्ल्यूडी ने इन कार्यों का टुकड़ाें में टेंडर किया जो सहगल कांट्रेक्टर को 14.90 फीसदी अधिक रेट में दिया गया। इससे पहले टेंडर की तुलना में सरकारी खजाने से 59.22 लाख रुपए अधिक देने पड़े। अब सवाल ये खड़ा होता है कि पीडब्ल्यूडी ने पहले टेंडर में बाधा डालने के लिए पुरानी शिकायत को क्यों आगे किया?


जयपुर से टेंडर किया गया था। संबंधित ठेकेदार की शिकायत यहां एक चल रही थी जिसकी जांच की गई। रिपोर्ट सही आई तो उसी ठेकेदार से काम करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसलिए दोबारा टेंडर किया गया। सभी टेंडर नियमों के तहत ही किए गए हैं। लगाए गए आरोप निराधार हैं।

-- संगीत अरोड़ा, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी

मुख्य अभियंता कार्यालय की ओर से दिए गए टेंडर के बाद यहां के पीडब्ल्यूडी अफसरों को वर्कऑर्डर जारी करने चाहिए थे लेकिन नहीं किए। 3 माह तक चक्कर कटवाए। जो शिकायत अफसर बता रहे हैं उसका इससे कोई लिंक ही नहीं। टुकड़ों में टेंडर करके सरकार पर भार बढ़ाया गया। अफसरों ने रास्ते निकाले ताकि मुख्य अभियंता कार्यालय की दोबारा टेंडर में जरूरत न पड़ सके।

--- करण यादव, पीडब्ल्यूडी कांट्रेक्टर