
इंद्र विमान (फोटो - पत्रिका)
अलवर की ऐतिहासिक भगवान जगन्नाथ रथयात्रा न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह अपने आप में एक समृद्ध इतिहास को भी समेटे हुए है। इस रथयात्रा की सबसे खास बात है दो मंजिला भव्य रथ, जिसे 'इंद्र विमान' कहा जाता है। लगभग दो शताब्दी पुराने इस रथ का नाता तिजारा और अलवर के राजघराने से जुड़ा हुआ है।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि तिजारा के तत्कालीन राजा बलवंत सिंह ने यह कीमती इंद्र विमान अलवर राजघराने को भेंट स्वरूप दिया था। बाद में अलवर राज परिवार ने इस ऐतिहासिक रथ को मंदिर समिति को सौंप दिया। तब से लेकर आज तक हर साल इसी दिव्य रथ पर विराजमान होकर भगवान जगन्नाथ अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं। इस दो मंजिला लकड़ी के रथ को यात्रा के दौरान रंग-बिरंगी रोशनियों और खूबसूरत फूलों से बेहद आकर्षक ढंग से सजाया जाता है।
मंदिर के महंत पंडित धर्मेंद्र शर्मा ने इस रथ से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि साल 1911 में जब दिल्ली में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम के स्वागत में दिल्ली दरबार सजाया गया था, तब अलवर सहित देश के सभी राजघरानों को न्योता मिला था। उस समय अलवर के महाराज इसी 'इंद्र विमान' में बैठकर दिल्ली पहुंचे थे। हाथियों द्वारा खींचे जाने वाले इस भव्य रथ को अलवर से दिल्ली पहुंचने में पूरे पांच दिन का समय लगा था। हालांकि, बदलते वक्त के साथ अब इस रथ को ट्रैक्टर की मदद से खींचा जाता है।
महंत शर्मा ने बताया कि रथयात्रा में माता जानकी के लिए जिस लकड़ी के रथ का इस्तेमाल होता है, वह इस इंद्र विमान से भी ज्यादा पुराना है। इंद्र विमान के आने से पहले भगवान जगन्नाथ की सवारी भी उसी पुराने रथ में निकलती थी। लेकिन जब राजघराने से इंद्र विमान मिला, तो उसमें भगवान जगन्नाथ को विराजमान किया जाने लगा और पुराना रथ माता जानकी की सवारी के लिए तय कर दिया गया। माता जानकी इसी रथ में सवार होकर रूपबास मेला स्थल पहुंचती हैं।
इस साल रथयात्रा के लिए 18 जुलाई को शुभ मुहूर्त में इंद्र विमान सहित सभी लकड़ी के रथों को रथखाने से बाहर निकाला जाएगा। चूंकि ये रथ काफी पुराने हैं, इसलिए हर साल इनकी बारीकी से मरम्मत, साफ-सफाई और साज-सज्जा की जाती है ताकि इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
दूसरी ओर अलवर जिला प्रशासन भी इस बड़े आयोजन को लेकर पूरी तरह अलर्ट है। रथयात्रा के रूट से लेकर रूपबास मेला स्थल तक यूआईटी (UIT) और अन्य विभागों ने काम शुरू कर दिया है। 18 जुलाई को प्रशासन की एक अहम बैठक होगी, जिसमें मेला स्थल के निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्थाओं की अंतिम मॉनिटरिंग की जाएगी।
Updated on:
08 Jul 2026 11:52 am
Published on:
08 Jul 2026 11:52 am
