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राज्य सरकार की फ्लैग​शिप योजना को फेल कर रहे अ​​धिकारी

अलवर. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रशासन शहरों के संग अभियान को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। अभियान के दूसरे चरण में सरकार कच्ची बस्तियों में पट्टे बांटने की अनुमति प्रदान कर चुकी है, लेकिन अलवर नगर परिषद की ओर से आज तक शहर की कच्ची बस्तियों में एक भी पट्टा जारी नहीं किया गया है।

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अलवर

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Sujeet Kumar

Jan 13, 2023

राज्य सरकार की फ्लैग​शिप योजना को फेल कर रहे अ​​धिकारी

राज्य सरकार की फ्लैग​शिप योजना को फेल कर रहे अ​​धिकारी,राज्य सरकार की फ्लैग​शिप योजना को फेल कर रहे अ​​धिकारी,राज्य सरकार की फ्लैग​शिप योजना को फेल कर रहे अ​​धिकारी


- अलवर नगर परिषद की ओर से शहर की कच्ची बस्तियों में नहीं दिया एक भी पट्टा

अलवर. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रशासन शहरों के संग अभियान को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। अभियान के दूसरे चरण में सरकार कच्ची बस्तियों में पट्टे बांटने की अनुमति प्रदान कर चुकी है, लेकिन अलवर नगर परिषद की ओर से आज तक शहर की कच्ची बस्तियों में एक भी पट्टा जारी नहीं किया गया है।

राज्य सरकार की ओर से करीब सवा साल पहले प्रशासन शहरों के संग अभियान की शुरुआत की थी। जिसमें शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को नगर परिषद और यूआईटी के माध्यम से उनके मकान, दुकान व भूखण्ड का पट्टा देना शुरू किया गया। अभियान के पहले चरण में कई अड़चनों के कारण कच्ची बस्तियों में पट्टे जारी नहीं किए जा सके। राज्य सरकार ने इन अड़चनों को दूर करते हुए अभियान के दूसरे चरण में कच्ची बस्तियों में पट्टे बांटने को लेकर हरी झंडी दे दी। सरकार के इन आदेशों के बाद अलवर शहर की कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों में खुशी की लहर थी कि उन्हें भी अब अपने मकान, दुकान और प्लॉट का पट्टा मिल सकेगा, लेकिन नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और खामियों के चलते अलवर शहर की कच्ची बस्तियों में एक भी व्यक्ति को पट्टा नहीं मिल सका है।

शहर में 37 कच्ची बस्ती, अब तक 400 ज्यादा फाइलें

अलवर शहर में 37 कच्ची बस्तियां हैं, जो कि नगर परिषद क्षेत्र में आती है। सरकार के आदेशों के बाद से अब तक कच्ची बस्ती में पट्टे के लिए नगर परिषद अलवर में 400 ज्यादा फाइलें लगाई जा चुकी हैं। वहीं, कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोग रोजाना नगर परिषद में पट्टे के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इनमें से किसी भी फाइल पर पट्टा जारी नहीं किया गया है।

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हमारी बस्ती रियासतकाल से बसी हुई है। सरकार ध्यान नहीं दे रही है। यहां के वाशिंदों को पट्टे मिलने चाहिए। हमने काफी संघर्ष किया है, लेकिन प्रशासन सुनता ही नहीं है।

- किशोरी लाल, अध्यक्ष, फैमिली लाइन विकास समिति।

यह सैंकड़ों साल पुरानी बसी गरीब मजदूरों की बस्ती है। नागरिकों के पास पट्टे नहीं है। जिसके बिना वे अपनी काबिज भूमि के मालिकाना हक से वंचित है। इस कारण सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं उठा पाते हैं।

नानगराम, नागरिक फैमिली लाइन

गरीब मजदूरों की कोई नहीं सुनता। प्रशासन केवल दिखावा करता है। सरकार भी नागरिकों की मांग पर ध्यान नहीं देकर केवल झूठी वाहवाही लूटना चाहती है।

- कृष्णा, निवासी कच्ची बस्ती।

बस्ती के लोगों ने पट्टे की मांग को लेकर पूर्व में आंदोलन भी किया, लेकिन अधिकारी व जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन देकर आवाज को दबा दिया। उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

- गोपी वर्मा, निवासी कच्ची बस्ती।

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सरकार को पत्र लिखा

कच्ची बस्तियों में पट्टे जारी करने के सम्बन्ध में राज्य सरकार कई माह पहले ही आदेश जारी कर चुकी है, लेकिन नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी कच्ची बस्तियों में पट्टे जारी नहीं कर सरकार के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। अलवर शहर की कच्ची बस्तियों में अब तक एक भी पट्टा जारी नहीं किया गया है। इस सम्बन्ध में उनकी ओर से राज्य सरकार को भी पत्र लिखा गया है।

- घनश्याम गुर्जर, सभापति, नगर परिषद, अलवर।

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